Prayagraj : ड्रॉप्सी से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, पांच अस्पताल में भर्ती
प्रयागराज में ड्रॉप्सी से तीन लोगों की मौत हो गई है। इससे प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। महानिदेशक डॉ.लिली सिंह ने प्रयागराज के अपर निदेशक से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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मिलावटी तेल खाने से ड्रॉप्सी की चपेट में आए एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई है। जबकि, पांच लोग अस्पताल में भर्ती है। इनमें गंभीर हालत में दो भाइयों को स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के आईसीयू में 24 घंटे चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आशु पांडेय ने खाद्य निरीक्षक के साथ चिकित्सकों की टीम भेज कर इस मामले की जांच कराई है। जांच के बाद तेल में आर्जिमोना मेन्सिकाना टॉक्सीन पाए जाने की पुष्टि हुुई है।
मऊआइमा के हरखपुर जोगीपुर गांव में इस बीमारी की चपेट में महीने भर पहले एक परिवार आया था। इनके पैर में सूजन हो गई। शरीर में बेतहाशा दर्द होने के साथ ही चलने में दिक्कत होने लगी। परिवार के लोग बीमारी के बारे में समझ पाते, तबतक परिवार के मुखिया सहदेव(65) उनकी पत्नी जानकी देवी(60) और उनकी पोती आयुषी (11) की एक के बाद एक मौत हो गई।
एक महीने के भीतर हुई इन तीन मौतों को लेकर पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिवार के पांच अन्य सदस्यों के भी पैरों में सूजन और शरीर में दर्द होने से उनको मऊआईमा की सीएचसी पर ले जाया गया। वहां अधीक्षक डॉ. राम गोपाल वर्मा ने उपचार शुरू करा दिया, लेकिन जब हालत बिगड़ने लगी और पीड़ितों में बीमारी की वजहों को साझा किया, तब इसकी जानकारी सीएमओ को दी गई।
एसआरएन में 24 घंटे की जा रही निगरानी
फिर वहां से इस बीमारी से जान गंवाने वाले सहदेव के पुत्रों रामकुमार (35), इंद्रकुमार (25), बहू ललिता देवी (40) के अलावा दो बच्चों आयुष(5), महक (3) को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया। एसआरएन में रामकुमार और इंद्र कुमार की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें आईसीयू में रखा गया है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के निर्देशन में इन ड्रॉप्सी पीड़ित रोगियों की 24 घंटे निगरानी के लिए चार चिकित्सकों की टीम लगाई गई है। इसमें डॉ. जितेंद्र शुक्ला के अलावा किडनी विशेषज्ञ डॉ. सना,हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सचदेवा, डॉ. अभिषेक सिंह को लगाया गया है। इस मरीजों का उपचार करने वाले डॉ. जितेंद्र ने बताया कि दो मरीजों के पैरों में सूजन अधिक थी। अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। सांस भी अब पहले जैसी नहीं फूल रही है।
ईश्वर की कृपा ही कही जाएगी कि इस बीमारी को फैलने से रोक लिया गया। वरना यह महामारी का रूप धारण कर सकती थी। एक ही परिवार ने इस तरह के जहरीले तेल का सेवन किया था। डॉ. आशु पांडेय, सीएमओ।
डॉप्सी पीड़ित मरीजों को सघन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है। उनके उपचार में किसी तरह की कोताही न रह जाए, इसलिए वह खुद मानीटरिंग कर रहे हैं। सभी दवाएं स्टोर से मुफ्त में मुहैया कराई जा रही हैं। खून भी चढ़वाया गया है, ताकि उनका जीवन बचाया जा सके। डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य- मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।
इस रोग से ग्रसित व्यक्ति के हाथ-पैर तेजी से फूल जाते हैं। शरीर पर स्पॉटिंग और रक्तचाप काफी अनियमित हो जाता है। पाचन तंत्र और आमाशय पर असर डालता है। तेलों में मिलावट से ड्रॉप्सी रोग पनपने की संभावना जताई गई है।