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जामताड़ा गैंग के तीन मददगार गिरफ्तार, एक्टिवेटेड सिम करते थे सप्लाई
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Three helpers of Jamtara gang arrested, used to supply activated sim
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देश भर में साइबर अपराधों के लिए कुख्यात जामताड़ा के अलग-अलग गिरोहों के तीन मददगारों को साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह सभी साइबर अपराध करने वाले गिरोह के सदस्यों को प्री एक्टिवेटेड सिम उपलब्ध कराते थे। जिसका इस्तेमाल आम लोगों के साथ ठगी करने के लिए किया जाता था। फर्जी आधार पर एक्टिवेट किए गए सिम का इस्तेमाल किए जाने केचलते ही अपराधियों तक पहुंच पाना पुलिस के लिए बहुत मुश्किल हो जाता था। पुलिस ने बताया कि तीनों को जेल भेज दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों में सुजान मंडल, विश्वजीत बर्मन और आशीष बर्मन निवासी हबीबनगर, मालदा पश्चिम बंगाल हैं। साइबर थाना प्रभारी राजीव तिवारी ने बताया कि 2020 में कीडगंज निवासी रिटायर कर्मचारी घनश्याम दास के साथ ऑनलाइन ठगी की वारदात हुई थी। साइबर अपराधियों ने उनके खाते से कुल 16.78 लाख रुपये उड़ा दिए थे।
शिकायत पर मामला दर्ज करते हुए साइबर थाने की टीम जांच पड़ताल में जुटी। सामने आए तथ्यों के आधार पर उपरोक्त तीनों आरोपियों का नाम पता चला और फिर उनकी तलाश शुरू कर दी गई। उन्हें पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया और आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनसे पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए।
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कूरियर से भेजते हैं सिम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए सुजान मंडल ने बताया कि वह पहले जियो आउटलेट में बतौर मैनेजर तैनात रह चुका है। इसी दौरान वह अपने अंडर में काम करने वाले एजेंट व ड्स्ट्रिीब्यूटरों पर टारगेट पूरा करने का दबाव बनाकर सिम एक्टिवेट करवा लेता था। यही नहीं केवाईसी के लिए जमा कराए गए आधार या अन्य आईडी प्रूफ की ही नकल कर अलग-अलग नामों से जाली दस्तावेज तैयार कर लेता था। फिर उनके जरिये दूसरे सिम एक्टिवेट करता था। इस काम में विश्वजीत व आशीष उसकी मदद करते थे। इन प्री एक्टिवेटेड सिमों को वह जामताड़ा में बैठे साइबर अपराधियों को दे देते थे। जिसका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी के लिए किया जाता है।
जाली आधार से बच निकलते हैं अपराधी
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में यह बात सामने आई कि सिम जाली दस्तावेज पर एक्टिवेट करने के कारण ही पुलिस का अपराधियों तक पहुंच पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। जाली आधार में दिए गए पते पर पुलिस पहुंचती है तो पता चलता है कि उस व्यक्ति ने सिम लिया ही नहीं।
नए एसएसपी ने भी किया था गिरोह का भंडाफोड़
गौरतलब है कि एसएसपी अजय कुमार ने भी जनपद में कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद एक ऐसे ही गिरोह का भंडाफोड़ किया था। 29 जनवरी को तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 500 प्री एक्टिवेटेड सिम बरामद किए गए थे। तीनों ने बताया था कि वह पश्चिम बंगाल के साथ ही गुजरात, बिहार में भी प्री एक्टिवेटेड सिम बेचते थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि इस गिरोह ने पकड़े जाने से पहले करीब पांच हजार प्री एक्टिवेटेड सिम साइबर अपराधियों तक पहुंचाए थे।
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गिरफ्तार आरोपियों में सुजान मंडल, विश्वजीत बर्मन और आशीष बर्मन निवासी हबीबनगर, मालदा पश्चिम बंगाल हैं। साइबर थाना प्रभारी राजीव तिवारी ने बताया कि 2020 में कीडगंज निवासी रिटायर कर्मचारी घनश्याम दास के साथ ऑनलाइन ठगी की वारदात हुई थी। साइबर अपराधियों ने उनके खाते से कुल 16.78 लाख रुपये उड़ा दिए थे।
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शिकायत पर मामला दर्ज करते हुए साइबर थाने की टीम जांच पड़ताल में जुटी। सामने आए तथ्यों के आधार पर उपरोक्त तीनों आरोपियों का नाम पता चला और फिर उनकी तलाश शुरू कर दी गई। उन्हें पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया और आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनसे पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए।
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कूरियर से भेजते हैं सिम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए सुजान मंडल ने बताया कि वह पहले जियो आउटलेट में बतौर मैनेजर तैनात रह चुका है। इसी दौरान वह अपने अंडर में काम करने वाले एजेंट व ड्स्ट्रिीब्यूटरों पर टारगेट पूरा करने का दबाव बनाकर सिम एक्टिवेट करवा लेता था। यही नहीं केवाईसी के लिए जमा कराए गए आधार या अन्य आईडी प्रूफ की ही नकल कर अलग-अलग नामों से जाली दस्तावेज तैयार कर लेता था। फिर उनके जरिये दूसरे सिम एक्टिवेट करता था। इस काम में विश्वजीत व आशीष उसकी मदद करते थे। इन प्री एक्टिवेटेड सिमों को वह जामताड़ा में बैठे साइबर अपराधियों को दे देते थे। जिसका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी के लिए किया जाता है।
जाली आधार से बच निकलते हैं अपराधी
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में यह बात सामने आई कि सिम जाली दस्तावेज पर एक्टिवेट करने के कारण ही पुलिस का अपराधियों तक पहुंच पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। जाली आधार में दिए गए पते पर पुलिस पहुंचती है तो पता चलता है कि उस व्यक्ति ने सिम लिया ही नहीं।
नए एसएसपी ने भी किया था गिरोह का भंडाफोड़
गौरतलब है कि एसएसपी अजय कुमार ने भी जनपद में कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद एक ऐसे ही गिरोह का भंडाफोड़ किया था। 29 जनवरी को तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 500 प्री एक्टिवेटेड सिम बरामद किए गए थे। तीनों ने बताया था कि वह पश्चिम बंगाल के साथ ही गुजरात, बिहार में भी प्री एक्टिवेटेड सिम बेचते थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि इस गिरोह ने पकड़े जाने से पहले करीब पांच हजार प्री एक्टिवेटेड सिम साइबर अपराधियों तक पहुंचाए थे।