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सरकारी क्वार्टर में तीन लाशें, पुलिस लाइन में फैली सनसनीश्
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three deadbody in police line
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। सरकारी क्वार्टर के भीतर एक साथ तीन लाशें मिलने की खबर से पुलिस लाइन में सनसनी फैल गई। चौंकाने वाली बात यह कि एक कमरे के भीतर दो लोगों की सिर कूंचकर हत्या कर दी गई और किसी को चीख तक नहीं सुनाई दी। वारदात के बारे में सुनकर पड़ोसी स्तब्ध रह गए तो मौके की हालत देखने वाले पुलिस अफसर भी हैरान थे।
फॉलोवर गोविंदनारायण करीब 20 सालों से पुलिस लाइन स्थित सरकारी क्वार्टर में रह रहे थे। पुलिस लाइन के नौ नंबर गेट के पास स्थित ए-5 ब्लॉक का पहले मंजिल पर बना 291 नंबर क्वार्टर उन्हें आवंटित हुआ था। दोतल के हर ब्लॉक में छह क्वार्टर हैं और हर तल पर दो क्वार्टर स्थित हैं। हर क्वार्टर में दो कमरे और पीछे की ओर बालकनी है। क्वार्टर में दो दरवाजे हैं जिनमेें से एक बारजे व दूसरा पीछे की ओर स्थित बालकनी में खुलता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तीनों शव भीतर के कमरे में मिले। फॉलोवर की लाश छत के चुल्ले से लगे फंदे पर लटकी हुई थी जबकि उसकी पत्नी व बेटे की खून से लथपथ लाशें बाईं ओर जमीन पर पड़ी थीं।
दोनों औंधे मुंह पड़े थे और उनके आसपास काफी मात्रा मेें खून भी फैला हुआ था। पुलिस अफसरों का कहना है कि मौके की हालत देखकर तो यही लग रहा है कि सिर में भारी चीज से वारकर दोनों को मौत के घाट उतारा गया। अब चौंकाने वाली बात यह है कि एक कमरे में दो लोगों की सिर कूंचकर हत्या कर दी गई लेकिन आसपास के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां तक कि अगल-बगल रहने वालों ने किसी की चीख तक सुनाई देने की बात से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि कॉलोनी में फोर्स संग अफसरों का पहुंचना शुरू हुआ तो उन्हेें वारदात की जानकारी हुई। घटना के बारे में सुनकर वह स्तब्ध थे। उधर क्वार्टर के भीतर का नजारा देखने वाले पुलिस अफसर भी हैरान थे।
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खबर से फैल गई सनसनी, जुटी रही भीड़
सरकारी क्वार्टर में तीन लाशें मिलने की खबर फैली तो कॉलोनी में सनसनी फैल गई। सामने की ओर स्थित अन्य ब्लॉकों में रहने वाले लोग भी घरों से बाहर निकल आए। उधर एक के बाद हूटर बजाती पहुंची अफसरों की गाड़ियों से भी वहां हड़कंप रहा। कुछ पड़ोसियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गोविंदनारायण से रोजाना आमना-सामना होता था। लेकिन उन्हें देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि वह किसी परेशानी में हैं।
...तो भीतर से बंद नहीं था दरवाजा?
मृतक फॉलोवर के बेटे भारत ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि जब वह रात में क्वार्टर के बाहर पहुंचा तो दरवाजा बंद था। इसके बाद पड़ोसी की मदद से दरवाजा खोलकर कमरे में दाखिल हुआ। उधर जब पुलिस ने राकेश नाम के उस पड़ोसी से पूछताछ की तो उसका कहना था कि भारत ने उसे बताया कि काफी देर तक पुकारने के बाद भी भीतर से कोई जवाब नहीं मिल रहा। जिसके बाद उसने पहुंचकर जैसे ही पांव मारा, दरवाजा खुल गया। ऐसे में माना जा रहा है कि दरवाजा सिर्फ बंद तो किया गया था लेकिन उसमें भीतर से कुंडी नहीं लगाई गई। क्योंकि जांच पड़ताल के दौरान भी पुलिस को ऐसा कोई निशान नहीं मिला है। ऐसे में एक सवाल यह भी है कि दो हत्याएं करने वाला व्यक्ति दरवाजा भीतर से बंद करना कैसे भूल गया।
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फॉलोवर गोविंदनारायण करीब 20 सालों से पुलिस लाइन स्थित सरकारी क्वार्टर में रह रहे थे। पुलिस लाइन के नौ नंबर गेट के पास स्थित ए-5 ब्लॉक का पहले मंजिल पर बना 291 नंबर क्वार्टर उन्हें आवंटित हुआ था। दोतल के हर ब्लॉक में छह क्वार्टर हैं और हर तल पर दो क्वार्टर स्थित हैं। हर क्वार्टर में दो कमरे और पीछे की ओर बालकनी है। क्वार्टर में दो दरवाजे हैं जिनमेें से एक बारजे व दूसरा पीछे की ओर स्थित बालकनी में खुलता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तीनों शव भीतर के कमरे में मिले। फॉलोवर की लाश छत के चुल्ले से लगे फंदे पर लटकी हुई थी जबकि उसकी पत्नी व बेटे की खून से लथपथ लाशें बाईं ओर जमीन पर पड़ी थीं।
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दोनों औंधे मुंह पड़े थे और उनके आसपास काफी मात्रा मेें खून भी फैला हुआ था। पुलिस अफसरों का कहना है कि मौके की हालत देखकर तो यही लग रहा है कि सिर में भारी चीज से वारकर दोनों को मौत के घाट उतारा गया। अब चौंकाने वाली बात यह है कि एक कमरे में दो लोगों की सिर कूंचकर हत्या कर दी गई लेकिन आसपास के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां तक कि अगल-बगल रहने वालों ने किसी की चीख तक सुनाई देने की बात से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि कॉलोनी में फोर्स संग अफसरों का पहुंचना शुरू हुआ तो उन्हेें वारदात की जानकारी हुई। घटना के बारे में सुनकर वह स्तब्ध थे। उधर क्वार्टर के भीतर का नजारा देखने वाले पुलिस अफसर भी हैरान थे।
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खबर से फैल गई सनसनी, जुटी रही भीड़
सरकारी क्वार्टर में तीन लाशें मिलने की खबर फैली तो कॉलोनी में सनसनी फैल गई। सामने की ओर स्थित अन्य ब्लॉकों में रहने वाले लोग भी घरों से बाहर निकल आए। उधर एक के बाद हूटर बजाती पहुंची अफसरों की गाड़ियों से भी वहां हड़कंप रहा। कुछ पड़ोसियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गोविंदनारायण से रोजाना आमना-सामना होता था। लेकिन उन्हें देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि वह किसी परेशानी में हैं।
...तो भीतर से बंद नहीं था दरवाजा?
मृतक फॉलोवर के बेटे भारत ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि जब वह रात में क्वार्टर के बाहर पहुंचा तो दरवाजा बंद था। इसके बाद पड़ोसी की मदद से दरवाजा खोलकर कमरे में दाखिल हुआ। उधर जब पुलिस ने राकेश नाम के उस पड़ोसी से पूछताछ की तो उसका कहना था कि भारत ने उसे बताया कि काफी देर तक पुकारने के बाद भी भीतर से कोई जवाब नहीं मिल रहा। जिसके बाद उसने पहुंचकर जैसे ही पांव मारा, दरवाजा खुल गया। ऐसे में माना जा रहा है कि दरवाजा सिर्फ बंद तो किया गया था लेकिन उसमें भीतर से कुंडी नहीं लगाई गई। क्योंकि जांच पड़ताल के दौरान भी पुलिस को ऐसा कोई निशान नहीं मिला है। ऐसे में एक सवाल यह भी है कि दो हत्याएं करने वाला व्यक्ति दरवाजा भीतर से बंद करना कैसे भूल गया।