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दीवारों में दबकर तीन की मौत, कई घायल
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Three dead due to wallslide
- फोटो : CITY DESK
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लगातार बारिश में दर्जनों मकान ध्वस्त, पंचायत भवन में लोगों ने ली शरण, मवेशी भी मरे
प्रयागराज। लगातार बारिश में बृहस्पतिवार को भी कई कच्चे मकान ध्वस्त हो गए। मलबा में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई। इनमें दो लोग प्रतापगढ़ के हैं। वहीं प्रयागराज के भीरपुर में दीवार में दबकर एक बच्ची की मौत हो गई। मकान गिरने की अलग-अलग घटनाअें में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बारिश और मलबा में दबने से लोगों की गृहस्थी भी बरबाद हो गई। इससे उनके सामने भोजन तक की समस्या खड़ी हो गई। कई परिवारों ने पंचायत भवन में शरण ले रखी है। बारिश में कई जानवरों की भी मौत हो गई।
बारिश भीरपुर के सेमरी तालुका पुरवा गजराज सिंह पटेल के परिवार को जीवन भर का दर्द दे गई। गजराज का बेटा अमन बाबू एवं एक साल की बेटी सत्यांशी घर में खेल रहे थे। तभी दीवार गिर गई। इसके मलबे में दोनों बच्चे दब गए। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। वहीं अमन गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रतापगढ़ में कुंडा के महेवा मलकिया गांव में कच्चा मकान गिरने से 55 साल की रामा देवी की मौत हो गई। कृष्ण कुमार का जर्जर मकान था। इसकी वजह से पति-पत्नी बगल में ही छप्पर बनाकर रहते थे लेकिन मकान बृहस्पतिवार भोर में घर गिर गया। इसके मलबा की चपेट में आने से पत्नी रामा की मौत हो गई। कृष्ण कुमार उस समय कहीं बाहर गया था। पट्टी के पिपरी मोतिगरपुर गांव निवासी शीतला प्रसाद की पत्नी फूलपत्ती देवी की छप्पर के दीवार में दबकर मौत हो गई। पति-पत्नी छप्पर में सो रहे थे। छप्पर के चारोें तरफ पानी लग गया था तथा बुधवार की रात उसकी कच्ची दीवार ढह गई। इसकी चपेट में आने से फूलपत्ती की मौत हो गई। मलबे में दबने से शीतला प्रसाद भी गंभीर रूप से घायल हो गया।
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लगातार बारिश में प्रयागराज शंकरगढ़, घूरपुर, कौंधियारा, होलागढ़, श्रृंगवेरपुरधाम, हंडिया के अलग-अलग गांवों में 50 से अधिक मकान गिर गए तथा लोगों का काफी नुकसान हुआ। मकान गिरने से कई लोगों के सामने भोजन तथा आवास का संकट खड़ा गया है। बरौत में बिजली गिरने से एक भैस की भी मौत हो गई। कौशाम्बी में भी दर्जनों मकान गिर गए। घर में बंधे दो मवेशियों की मौत भी हो गई।
फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा
बारिश में बाढ़ का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। मांडा के कर्णावती नदी फिर से ऊफान पर है तथा फलल डूब गई। वहां तीसरी बार फसल डूबी है। इसी तरह के हालात टोंस आदि नदियों के किनारे के गांवों में भी है।
सब्जी मंडी में भरा पानी, भारी नुकसान
मंडी समिति जसरा परिसर बृहस्पतिवार को तालाब तब्दील हो गया। यह क्षेत्र की बड़ी सब्जी मंडी है तथा लाखाें रुपये का सामान पानी में डूब गया। बारिश तथा पानी लगने से मंडी में कई दिनों से कारोबार ठप है। यह स्थिति कई अन्य ग्रामीण मंडियों की भी है।
हजारों एकड़ फसल बर्बाद
बाढ़ तथा लगातार बारिश में हजारों एकड़ फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। सरकारी सर्वे के अनुसार बाढ़ में 15 हजार एकड़ से अधिक फसल डूब गई थी। बाढ़ का पानी निकलने के बाद कुछ उत्पादन की उम्मीद थी लेकिन लगातार बारिश से किसानों में मायूसी है। कई दिनों से हो रही बारिश से ऊपरी इलाके भी ताल-तलैया बन गए हैं तथा फसल डूब गई है। बारिश के साथ हवा की वजह से धान की फसल भी लेट गई है। इससे धान की फसल को 15 से 20 तथा दलहनी एवं तिलहनी फसलों को 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान की बात कही जा रही है।
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प्रयागराज। लगातार बारिश में बृहस्पतिवार को भी कई कच्चे मकान ध्वस्त हो गए। मलबा में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई। इनमें दो लोग प्रतापगढ़ के हैं। वहीं प्रयागराज के भीरपुर में दीवार में दबकर एक बच्ची की मौत हो गई। मकान गिरने की अलग-अलग घटनाअें में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बारिश और मलबा में दबने से लोगों की गृहस्थी भी बरबाद हो गई। इससे उनके सामने भोजन तक की समस्या खड़ी हो गई। कई परिवारों ने पंचायत भवन में शरण ले रखी है। बारिश में कई जानवरों की भी मौत हो गई।
बारिश भीरपुर के सेमरी तालुका पुरवा गजराज सिंह पटेल के परिवार को जीवन भर का दर्द दे गई। गजराज का बेटा अमन बाबू एवं एक साल की बेटी सत्यांशी घर में खेल रहे थे। तभी दीवार गिर गई। इसके मलबे में दोनों बच्चे दब गए। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। वहीं अमन गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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प्रतापगढ़ में कुंडा के महेवा मलकिया गांव में कच्चा मकान गिरने से 55 साल की रामा देवी की मौत हो गई। कृष्ण कुमार का जर्जर मकान था। इसकी वजह से पति-पत्नी बगल में ही छप्पर बनाकर रहते थे लेकिन मकान बृहस्पतिवार भोर में घर गिर गया। इसके मलबा की चपेट में आने से पत्नी रामा की मौत हो गई। कृष्ण कुमार उस समय कहीं बाहर गया था। पट्टी के पिपरी मोतिगरपुर गांव निवासी शीतला प्रसाद की पत्नी फूलपत्ती देवी की छप्पर के दीवार में दबकर मौत हो गई। पति-पत्नी छप्पर में सो रहे थे। छप्पर के चारोें तरफ पानी लग गया था तथा बुधवार की रात उसकी कच्ची दीवार ढह गई। इसकी चपेट में आने से फूलपत्ती की मौत हो गई। मलबे में दबने से शीतला प्रसाद भी गंभीर रूप से घायल हो गया।
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लगातार बारिश में प्रयागराज शंकरगढ़, घूरपुर, कौंधियारा, होलागढ़, श्रृंगवेरपुरधाम, हंडिया के अलग-अलग गांवों में 50 से अधिक मकान गिर गए तथा लोगों का काफी नुकसान हुआ। मकान गिरने से कई लोगों के सामने भोजन तथा आवास का संकट खड़ा गया है। बरौत में बिजली गिरने से एक भैस की भी मौत हो गई। कौशाम्बी में भी दर्जनों मकान गिर गए। घर में बंधे दो मवेशियों की मौत भी हो गई।
फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा
बारिश में बाढ़ का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। मांडा के कर्णावती नदी फिर से ऊफान पर है तथा फलल डूब गई। वहां तीसरी बार फसल डूबी है। इसी तरह के हालात टोंस आदि नदियों के किनारे के गांवों में भी है।
सब्जी मंडी में भरा पानी, भारी नुकसान
मंडी समिति जसरा परिसर बृहस्पतिवार को तालाब तब्दील हो गया। यह क्षेत्र की बड़ी सब्जी मंडी है तथा लाखाें रुपये का सामान पानी में डूब गया। बारिश तथा पानी लगने से मंडी में कई दिनों से कारोबार ठप है। यह स्थिति कई अन्य ग्रामीण मंडियों की भी है।
हजारों एकड़ फसल बर्बाद
बाढ़ तथा लगातार बारिश में हजारों एकड़ फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। सरकारी सर्वे के अनुसार बाढ़ में 15 हजार एकड़ से अधिक फसल डूब गई थी। बाढ़ का पानी निकलने के बाद कुछ उत्पादन की उम्मीद थी लेकिन लगातार बारिश से किसानों में मायूसी है। कई दिनों से हो रही बारिश से ऊपरी इलाके भी ताल-तलैया बन गए हैं तथा फसल डूब गई है। बारिश के साथ हवा की वजह से धान की फसल भी लेट गई है। इससे धान की फसल को 15 से 20 तथा दलहनी एवं तिलहनी फसलों को 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान की बात कही जा रही है।