{"_id":"59725ea44f1c1b317f8b46a5","slug":"thousands-of-doctors-in-the-province-have-invalid-diploma","type":"story","status":"publish","title_hn":"सूबे में हजारों डॉक्टरों की डिप्लोमा अमान्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सूबे में हजारों डॉक्टरों की डिप्लोमा अमान्य
मुनेंद्र बाजपेयी, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 22 Jul 2017 01:48 AM IST
विज्ञापन
हस्तरेखा चिकित्सक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूबे के हजारों विशेषज्ञ डॉक्टरों और डिप्लोमाधारी चिकित्सकों पर मेडिकल कौंसिल के नियमों की तलवार चल गई है। मेडिकल कॉलेजों में बिना एमसीआई की अनुमति डिप्लोमा कोर्स कराए गए। स्वास्थ्य विभाग ने भी सरकारी डॉक्टरों को स्पेशलिस्ट बनाने के लिए डिप्लोमा कराया। अब एमसीआई के पंजीकरण न किए जाने से सूबे के बाहर बड़े-बड़े अस्पतालों में कार्यरत इन विशेषज्ञों की नौकरी खतरे में हैं। सरकारी डॉक्टर और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक भी ‘फर्जी’ की श्रेणी में आ गए हैं। एससीआई की सख्ती से डॉक्टरों में हड़कंप मचा है। इससे यूपी में डिप्लोमा करने वाले नए और पुराने करीब 20 हजार सरकारी, निजी डॉक्टर प्रभावित हैं। डॉक्टरों के पास अनुभव तो है लेकिन प्रमाण पत्र मान्य नहीं है। इलाहाबाद में भी कई स्पेशलिस्ट डॉक्टर और डायग्नोस्टिक सेेंटर भी इसमें शामिल में हैं
प्रदेश में नए, पुराने कुल 15 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, आगरा, मेरठ काफी पुराने हैं। इसके अलावा आजमगढ़, बांदा, झांसी, सहारनपुर, कन्नौज, जालौन, झांसी, अंबेडकरनगर, सैफई और राममनोहर लोहिया लखनऊ हैं। पुराने मेडिकल कॉलेजों में कम से कम 15 विभागों को पीजी कोर्स की मान्यता है। एमसीआई के नियमों के मुताबिक हर कोर्स में दो डिप्लोमा कोर्स चलाए जा सकते हैं। कौंसिल से डिग्री, डिप्लोमा के लिए अलग-अलग मान्यता दी जाती है। सूत्रों के मुताबिक अधिकतर मेडिकल कॉलेजों में डिप्लोमा कोर्स मान्यता प्राप्त नहीं हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग ने सामान्य डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों से डिप्लोमा करा स्पेशलिस्ट बना तैनाती दी। निजी चिकित्सकों ने विभिन्न तरह की विशेषज्ञता के लिए डिप्लोमा कोर्स कर नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर खोल लिए।
नियम कानून बदले तो मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया और स्टेट मेडिकल कौंसिल में पंजीकरण कराने गए डॉक्टर मायूस हो गए। उन्हें बताया गया कि मेडिकल कॉलेजों ने बिना एमसीआई की अनुमति के डिप्लोमा कोर्स कराए। इसलिए इनका पंजीकरण नहीं कराया जा सकता। सरकारी चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग समेत सूबे के करीब 20 हजार डॉक्टर अमान्य डिप्लोमा कर ‘फर्जी’ की श्रेणी में आ गए हैं। सरकारी डॉक्टर तो अभी बचे हैं लेकिन दूसरे प्रदेशों में कार्यरत सरकारी डॉक्टरों की नौकरी खतरे में है। निजी चिकित्सकों पर भी मान्यता का संकट मंडरा रहा है।
विज्ञापन
आखिर दोषी कौन
एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को एमसीआई में पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद वे मरीज देख सकते हैं, दवाएं लिख सकते हैं। क्लीनिक खोलने के लिए सीएमओ के यहां पंजीकरण कराना होता है। इसी तरह विशेषज्ञता हासिल करने के लिए डिप्लोमा करने वाले चिकित्सकों को भी एक बार फिर अतिरिक्त अहर्ता का एमसीआई में पंजीकरण कराना आवश्यक होता है। चिकित्सकों के मुताबिक गलती मेडिकल कॉलेज प्रशासन की है। बिना मान्यता डिप्लोमा कोर्स क्यों कराया। अब नियम बदले तो जरूरत पर एमसीआई डॉक्टरों का पंजीकरण नहीं कर रहा है। हालांकि इलाहाबाद में वर्ष 2013 से और अन्य कई मेडिकल कॉलेजों में इस तरह के मामले सामने आने पर बिना मान्यता वाले डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश बंद कर दिया गया है। कुछ कॉलेजों में मान्यता वाले कुछ गिने-चुने कोर्स चल रहे हैं।
मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए डिप्लोमा कोर्स करने वाले अधिकतर डॉक्टरों ने इस बात की जानकारी थी कि संबंधित मेडिकल कॉलेजों में जो कोर्स उन्हें करना है, उसकी एससीआई से मान्यता नहीं है। इस बात की कई मेडिकल कॉलेजों में कोर्स करने वाले चिकित्सकों ने अंडरटेकिंग भी दी है कि उन्हें बिना मान्यता वाले कोर्स करने में कोई आपत्ति नहीं है। इस बात की जानकारी शासन को भी है।
स्टेट मेडिकल कौंसिल में उन्हीं डिग्री या डिप्लोमाधारी डॉक्टरों का पंजीकरण किया जाता है, जो मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एससीआई) से मान्यता प्राप्त कोर्स करके आए हैं। कई मेडिकल कॉलेजों में मान्यता प्राप्त डिप्लोमा कोर्स संचालित हैं, बिना मान्यता वाले कोर्स करने वालों का पंजीकरण करने का प्रावधान नहीं हैं। - डॉ. राजेश जैन, स्टेट मेडिकल कौंसिल
विशेषज्ञता के लिए महत्वपूर्ण डिप्लोमा कोर्स
0 डीएम- डॉक्टर ऑफ मेडिसिन
0 एमसीएच- मास्टर ऑफ सर्जरी
0 डीजीओ- गायनी
0 डीसीएच- पीडियाट्रिक्स
0 डी आर्थों- हड्डी
0 डीओएमएस- ऑप्थोमलॉजी
0 डीए- एनेस्थीसिया
0 डीएमआरडी-डिप्लोमा इन रेडियो डायग्नोसिस
0 डीएमआरटी- डिप्लोम इन रेडियो थीरेपी
0 डीएलओ- ईएंडटी
मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एससीआई) और स्टेट मेडिकल कौंसिल में एमबीबीएस के बाद अतिरिक्त डिप्लोमा, डिग्री का पंजीकरण ने होने से परेशान चिकित्सकों ने इसी हफ्ते अगल-अलग तिथियों में सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई है। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल व आईएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक डॉ. बीबी अग्रवाल के नेतृत्व में चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी से वार्ता कर ज्ञापन दिया। डॉक्टरों ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह को ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई है। बताया कि प्रवेश के समय चिकित्सकों को कोर्स की मान्यता के संबंध में जानकारी नहीं थी। बिना मान्यता कोर्स कराने के लिए चिकित्सक दोषी नहीं हैं।
विज्ञापन
प्रदेश में नए, पुराने कुल 15 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, आगरा, मेरठ काफी पुराने हैं। इसके अलावा आजमगढ़, बांदा, झांसी, सहारनपुर, कन्नौज, जालौन, झांसी, अंबेडकरनगर, सैफई और राममनोहर लोहिया लखनऊ हैं। पुराने मेडिकल कॉलेजों में कम से कम 15 विभागों को पीजी कोर्स की मान्यता है। एमसीआई के नियमों के मुताबिक हर कोर्स में दो डिप्लोमा कोर्स चलाए जा सकते हैं। कौंसिल से डिग्री, डिप्लोमा के लिए अलग-अलग मान्यता दी जाती है। सूत्रों के मुताबिक अधिकतर मेडिकल कॉलेजों में डिप्लोमा कोर्स मान्यता प्राप्त नहीं हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग ने सामान्य डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों से डिप्लोमा करा स्पेशलिस्ट बना तैनाती दी। निजी चिकित्सकों ने विभिन्न तरह की विशेषज्ञता के लिए डिप्लोमा कोर्स कर नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर खोल लिए।
विज्ञापन
नियम कानून बदले तो मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया और स्टेट मेडिकल कौंसिल में पंजीकरण कराने गए डॉक्टर मायूस हो गए। उन्हें बताया गया कि मेडिकल कॉलेजों ने बिना एमसीआई की अनुमति के डिप्लोमा कोर्स कराए। इसलिए इनका पंजीकरण नहीं कराया जा सकता। सरकारी चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग समेत सूबे के करीब 20 हजार डॉक्टर अमान्य डिप्लोमा कर ‘फर्जी’ की श्रेणी में आ गए हैं। सरकारी डॉक्टर तो अभी बचे हैं लेकिन दूसरे प्रदेशों में कार्यरत सरकारी डॉक्टरों की नौकरी खतरे में है। निजी चिकित्सकों पर भी मान्यता का संकट मंडरा रहा है।
विज्ञापन
आखिर दोषी कौन
एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को एमसीआई में पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद वे मरीज देख सकते हैं, दवाएं लिख सकते हैं। क्लीनिक खोलने के लिए सीएमओ के यहां पंजीकरण कराना होता है। इसी तरह विशेषज्ञता हासिल करने के लिए डिप्लोमा करने वाले चिकित्सकों को भी एक बार फिर अतिरिक्त अहर्ता का एमसीआई में पंजीकरण कराना आवश्यक होता है। चिकित्सकों के मुताबिक गलती मेडिकल कॉलेज प्रशासन की है। बिना मान्यता डिप्लोमा कोर्स क्यों कराया। अब नियम बदले तो जरूरत पर एमसीआई डॉक्टरों का पंजीकरण नहीं कर रहा है। हालांकि इलाहाबाद में वर्ष 2013 से और अन्य कई मेडिकल कॉलेजों में इस तरह के मामले सामने आने पर बिना मान्यता वाले डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश बंद कर दिया गया है। कुछ कॉलेजों में मान्यता वाले कुछ गिने-चुने कोर्स चल रहे हैं।
मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए डिप्लोमा कोर्स करने वाले अधिकतर डॉक्टरों ने इस बात की जानकारी थी कि संबंधित मेडिकल कॉलेजों में जो कोर्स उन्हें करना है, उसकी एससीआई से मान्यता नहीं है। इस बात की कई मेडिकल कॉलेजों में कोर्स करने वाले चिकित्सकों ने अंडरटेकिंग भी दी है कि उन्हें बिना मान्यता वाले कोर्स करने में कोई आपत्ति नहीं है। इस बात की जानकारी शासन को भी है।
स्टेट मेडिकल कौंसिल में उन्हीं डिग्री या डिप्लोमाधारी डॉक्टरों का पंजीकरण किया जाता है, जो मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एससीआई) से मान्यता प्राप्त कोर्स करके आए हैं। कई मेडिकल कॉलेजों में मान्यता प्राप्त डिप्लोमा कोर्स संचालित हैं, बिना मान्यता वाले कोर्स करने वालों का पंजीकरण करने का प्रावधान नहीं हैं। - डॉ. राजेश जैन, स्टेट मेडिकल कौंसिल
विशेषज्ञता के लिए महत्वपूर्ण डिप्लोमा कोर्स
0 डीएम- डॉक्टर ऑफ मेडिसिन
0 एमसीएच- मास्टर ऑफ सर्जरी
0 डीजीओ- गायनी
0 डीसीएच- पीडियाट्रिक्स
0 डी आर्थों- हड्डी
0 डीओएमएस- ऑप्थोमलॉजी
0 डीए- एनेस्थीसिया
0 डीएमआरडी-डिप्लोमा इन रेडियो डायग्नोसिस
0 डीएमआरटी- डिप्लोम इन रेडियो थीरेपी
0 डीएलओ- ईएंडटी
मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एससीआई) और स्टेट मेडिकल कौंसिल में एमबीबीएस के बाद अतिरिक्त डिप्लोमा, डिग्री का पंजीकरण ने होने से परेशान चिकित्सकों ने इसी हफ्ते अगल-अलग तिथियों में सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई है। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल व आईएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक डॉ. बीबी अग्रवाल के नेतृत्व में चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी से वार्ता कर ज्ञापन दिया। डॉक्टरों ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह को ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई है। बताया कि प्रवेश के समय चिकित्सकों को कोर्स की मान्यता के संबंध में जानकारी नहीं थी। बिना मान्यता कोर्स कराने के लिए चिकित्सक दोषी नहीं हैं।