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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   There will be a stream of Ganga at the confluence, 22 hectares of additional space will be available for bathi

Mahakumbh : संगम पर होगी गंगा की एक धारा, स्नान के लिए मिलेगी 22 हेक्टेयर अतिरिक्त जगह, समतलीकरण शुरू

Thu, 19 Dec 2024 06:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 19 Dec 2024 06:59 PM IST
सार

अब ड्रेजिंग का काम अंतिम दौर में है। शास्त्री ब्रिज के नीचे ड्रेजिंग का काम करीब पूरा हो गया है तथा समतलीकरण भी शुरू हो गया है। हालांकि, संगम के पास गंगा की दो तेज धाराएं हैं। इससे ड्रेजिंग में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। गंगा की प्रबल धारा के कारण ड्रेजिंग मशीनें बार-बार अस्थिर हो रही थीं। डिस्चार्ज पाइप मुड़ जाते और मशीनों को नियंत्रित करना कठिन हो जाता।

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There will be a stream of Ganga at the confluence, 22 hectares of additional space will be available for bathi
महाकुंभ में चल रहा कार्य। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संगम नोज से शास्त्री ब्रिज के बीच गंगा की एक धारा होगी। इसके लिए ड्रेजिंग का कार्य अंतिम चरण में है। इससे संगम पर स्नान के लिए 22 हेक्टेयर अतिरिक्त जगह मिलेगी। महाकुंभ में 40 करोड़ लोगों के स्नान की उम्मीद है। इसके विपरीत गंगा में अधिक समय तक पानी टिके रहने तथा तीन धाराएं होने की वजह से संगम पर स्थान कम हो गया। इससे स्नान को लेकर चुनौती बन गई है। इस समस्या के समाधान के लिए नदी की एक धारा बनाकर सर्कुलेटिंग एरिया बढ़ाने की योजना बनाई गई। इसके लिए आईआईटी गुवाहाटी की मदद ली गई है।

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अब ड्रेजिंग का काम अंतिम दौर में है। शास्त्री ब्रिज के नीचे ड्रेजिंग का काम करीब पूरा हो गया है तथा समतलीकरण भी शुरू हो गया है। हालांकि, संगम के पास गंगा की दो तेज धाराएं हैं। इससे ड्रेजिंग में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। गंगा की प्रबल धारा के कारण ड्रेजिंग मशीनें बार-बार अस्थिर हो रही थीं। डिस्चार्ज पाइप मुड़ जाते और मशीनों को नियंत्रित करना कठिन हो जाता।
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इतना ही नहीं एक मशीन का पिन क्षतिग्रस्त हो तो दूसरे किनारे लग गया। इसके बाद भी काम जारी रहा। टीम ने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए बड़े एंकरों और पॉटून पुल का सहारा लिया। मोटे रस्सों का उपयोग कर ड्रेजरों को नदी के किनारों से स्थिर रखा गया।
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ड्रेजिंग का काम पूरा होने तथा गंगा में एक धारा बनने के बाद संगम के पास मेला क्षेत्र को करीब 22 हेक्टेयर अतिरिक्त जगह मिलेगी, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ एक जगह पर स्नान कर सकेंगे। इस जगह को समतल करने के लिए पांच लाख मीट्रिक टन बालू की जरूरत होगी।

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