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घर में अनाज का एक दाना नहीं, बाहर निकलने पर मिल रही पुलिस की लाठी

Mon, 13 Apr 2020 12:00 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 13 Apr 2020 12:00 AM IST
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there is not a grain of grain in the house police sticks being found outside
there is not a grain of grain in the house police sticks being found outside - फोटो : CITY DESK
लॉकडाउन ने एक साथ कई दुश्वारियों को जन्म दे दिया है। काम धंधा ठप होने से जहां रोटी के लाले पड़ गए हैं, वहीं अब घरों से निकलना भी कम आफत की बात नहीं रह गई है। लॉकडाउन में फंसे उड़ीसा के भुवनेश्वर, केंद्रापारा, राजनगर इलाके के दो दर्जन से अधिक मजदूर परिवारों की यही दशा है। जो पैसे थे, वो खत्म हो गए। अब न खाने के लिए अनाज है ना ही पास में रुपये। किराये के लिए रखी रकम भी चावल दाल, सब्जी में खर्च हो गए। अब बाहर निकलने पर काम या खाने के पैकेट की जगह पुलिस की लाठियां पड़ रही हैं।
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रविवार को ऐसा ही वाकया अशोकनगर में फंसे उड़ीसा केगांव तेरोही, जिला केंद्रापारा निवासी मजदूर मनोज कुमार के साथ हुआ। मनोज अपने किराए के मकान से निकलकर बाबा चौराहे पर अपने ढाई वर्षीय बच्चे के लिए दवा लेने गया था। मेडिकल स्टोर पर पहुंचते ही पुलिस ने दौड़ा दिया और लाठी पड़ने लगी। उसके दाहिने हाथ की उंगली में सूजन आ गई है। मनोज ने बताया कि दवा लिए बगैर उसे भागकर अपने ठीहे पर आना पड़ा। घर में अब खर्च चलाने के लिए रुपये नहीं रह गए हैं। उसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि लॉकडाउन बढ़ा तो फिर जिंदगी आगे कैसे बढ़ेगी। इसी तरह जगत रावत जनता कर्फ्यू लगने से एक दिन पहले ही यहां कमाने के लिए आया था। लॉकडाउन में फंसने की वजह से परिवार केलोग बार-बार फोन कर किसी तरह निकलने की सलाह दे रहे हैं। उसका कहना है कि वह उड़ीसा के केंद्रापारा जिले का निवासी है। करीब 11सौ किमी का सफर पैदल किसी भी दशा में तय नहीं किया जा सकता। सरकारी स्तर पर अगर राशन की मदद मिल जाती तो वह मुश्किल वक्त से पार पा जाता। मनोज और जगत जैसे अशोकनगर में उनके 23 साथी परिवार अनाज और रजमर्रा के अन्य संसाधनों के लिए बिलबिला रहे हैं। इसी तरह पलंबर का काम करने वाले उड़ीसा के अभिराम, सुरेश कुमार, विचित्र, त्रिलोचन, संजय कुमार, सूर्यकांत पात्रा, सुरेंद्र कुमार, जयंत कुमार समेत कई परिवार लॉकडाउन में फंसकर मददगारों की राह देख रहे हैं, लेकिन उनकी मानें तो अब तक उनकी सहायता के लिए कोई आगे नहीं आया है।
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पलंबर का काम करने वाले इन मजदूर परिवारों की मदद के लिए जिला प्रशासन के कई अफसरों को बार-बार फोन किया जा रहा है, लेकिन उनका फोन नहीं उठ रहा है। ऐसे में इन मजदूरों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता।
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