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कीडगंज बवाल : मुख्य आरोपी के चेहरे पर शिकन नहीं, मुस्कुराता रहा साथी

Wed, 05 Jan 2022 12:38 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Jan 2022 12:38 AM IST
सार

मुख्य आरोपी विमलेश पांडेय के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी तो उसका साथी सतीश तो मुस्कुराता रहा। मीडिया के हर सवाल पर उन्होंने खामोशी ओढ़े रखी। उनके रवैये से प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस की ओर से किए गए दावों पर भी सवाल खड़े होते रहे।

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There is no wrinkle on the face of the main accused, the accomplice kept smiling
गिरफ्तारी के बाद भी हंसता रहा आरोपी। - फोटो : prayagraj

विस्तार

कीडगंज मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी तो नाटकीय ढंग से हुई ही। मीडिया के सामने पेश किए जाने के बाद उनका बर्ताव भी बेहद चौंकाने वाला रहा। सरेआम हत्या के मामले में गिरफ्तार मुल्जिमों में जहां पुलिस का खौफ दिखता है, वहीं इस मामले में पकड़े गए आरोपी पूरी तरह बेखौफ दिखे।

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मुख्य आरोपी विमलेश पांडेय के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी तो उसका साथी सतीश तो मुस्कुराता रहा। मीडिया के हर सवाल पर उन्होंने खामोशी ओढ़े रखी। उनके रवैये से प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस की ओर से किए गए दावों पर भी सवाल खड़े होते रहे।
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एक घंटे की देरी से लाए गए मीडिया के सामने
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली कई तरह से सवालों के घेरे में रही। पुलिस लाइन सभागार में तीनों आरोपियों को करीब एक घंटे बाद मीडिया के सामने लाया गया। जहां तीनों आरोपी निश्चिंत दिखे। मीडिया ने जब उनसे सवाल पूछना शुरू किया तो वह चुपचाप खड़े रहे। कई बार पूछने के बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस दौरान विमलेश सवालों को अनसुना करता रहा, वहीं सतीश तो मुस्कुराता भी रहा।
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रात में ही तैयार हो गई थी पटकथा
सूत्रों का कहना है कि पुलिस भले ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा कर रही हो। लेकिन तीनों एक दिन पहले ही पुलिस को मिल गए थे और रात में उनकी गिरफ्तारी की पटकथा तैयार की गई। सेटिंग और शर्तों पर उन्होंने पुलिस के सामने सरेंडर किया। सूत्रों का यह भी कहना है कि तीनों आरोपी घटना के बाद अगले दो दिनों में शहर में ही छिपकर रहते रहे। जिसमें आबकारी महकमे के कुछ लोग भी उनके मददगार रहे। पुलिस के समक्ष ‘सरेंडर की सेटिंग’ कितनी मजबूत थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर की अर्जी तक नहीं डाली।

कई सवालों के जवाब मिलने अभी बाकी
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर भले ही मामले के खुलासे का दावा किया हो, लेकिन कई सवालों के जवाब मिलने अभी बाकी हैं। पुलिस अफसरों का कहना है कि बहुत से सवाल ऐसे हैं, जिनके संबंध में अभी विवेचना जारी है। ऐसे में उनके बारे में अभी कुछ कह पाना मुश्किल है।
जिस मकान के विवाद में वारदात को अंजाम देने की बात कही जा रही है, उससे सीधे तौर पर विमलेश का कोई संबंध नहीं था। तो क्या असल वजह यही थी?
पुलिस के मुताबिक, विमलेश फरारी के दौरान कम से कम छह शहरों में रहा। तो क्या वह लगातार सफर ही करता रहा?
मामले में नामजद कराए गए दो अन्य संदीप व अवनीश पांडेय की घटना में क्या भूमिका रही?
11 महीने पहले भुक्तभोगी की दुकान पर बमबाजी की घटना में कोई संलिप्तता होने की बात से आरोपी ने इंकार किया है। तो उसके ही पैतृक निवास क्षेत्र के रहने वाले युवकों ने यह घटना किसके  कहने पर की?

घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग आरोप लगा रहे थे लगातार दबंगई के बावजूद विमलेश पर कार्रवाई नहीं हुई। तो क्या स्थानीय पुलिस वाकई में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को संरक्षण दे रही थी? 

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