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यहां भी रिक्त हैं आधे से अधिक न्यायाधीशों के पद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 29 Oct 2016 01:29 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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देश भर की अदालतों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को लेकर सुप्रीमकोर्ट की तल्खी जायज ही है। एशिया के सबसे बड़े उच्च न्यायालय में ही आधे से अधिक जजों के पद रिक्त हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट मुकदमों की संख्या के लिहाज से भी सबसे बड़ा हाईकोर्ट है। बावजूद इसके यहां कभी भी जजों का मानक पूरा नहीं किया जा सका। इसी कारण मुकदमों के निस्तारण में दशकों का वक्त लग रहा है।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता लंबे समय से इसे लेकर आंदोलन चला रहे हैं कि हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरा जाए। हाल ही में आयोजित हाईकोर्ट के 150वें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर स्वयं राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने माना कि जनता को त्वरित न्याय मिलना चाहिए। इसके लिए जजों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। यही वजह है कि न्यायाधीशों के अलावा वकीलों ने भी कोई ऐसा मंच नहीं होगा, जहां से जजों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए आवाज नहीं उठाई हो।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के मौजूदा अध्यक्ष अनिल तिवारी मानते हैं कि मुकदमोें के निस्तारण में विलंब की सबसे बड़ी वजह न्यायाधीशों की कमी है। न्यायपालिका पर मुकदमों का अत्यधिक बोझ है। जजों की कमी से वादकारियों को त्वरित न्याय दिलाने का उद्देश्य विफल हो चुका है। हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपीलें वर्ष 1980 और उससे पहले से भी लंबित हैं। अभियुक्त बिना न्याय के जेलों में बंद हैं। बार एसोसिएशन रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार आंदोलन चला है। कुछ अधिवक्ताओं ने इसे लेकर अनशन और आंदोलन तक किए हैं।
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बार कौंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष वीसी मिश्र का कहना है कि जब तक जजों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती है, न्याय दिलाने की बात बेमानी है। समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों का होना आवश्यक है।
हाईकोर्ट में जजों की मौजूदा स्थिति
कुल स्वीकृत पद- 160
वर्तमान जजों की संख्या- इलाहाबाद प्रधानपीठ- 56
लखनऊ खंडपीठ - 20
कुल मौजूदा संख्या- 76
पदों के सापेक्ष कमी- 84
लंबित मुकदमों की संख्या (अक्तूबर 2016)-
इलाहाबाद- 708344
लखनऊ पीठ- 217014
कुल - 925358
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हाईकोर्ट के अधिवक्ता लंबे समय से इसे लेकर आंदोलन चला रहे हैं कि हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरा जाए। हाल ही में आयोजित हाईकोर्ट के 150वें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर स्वयं राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने माना कि जनता को त्वरित न्याय मिलना चाहिए। इसके लिए जजों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। यही वजह है कि न्यायाधीशों के अलावा वकीलों ने भी कोई ऐसा मंच नहीं होगा, जहां से जजों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए आवाज नहीं उठाई हो।
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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के मौजूदा अध्यक्ष अनिल तिवारी मानते हैं कि मुकदमोें के निस्तारण में विलंब की सबसे बड़ी वजह न्यायाधीशों की कमी है। न्यायपालिका पर मुकदमों का अत्यधिक बोझ है। जजों की कमी से वादकारियों को त्वरित न्याय दिलाने का उद्देश्य विफल हो चुका है। हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपीलें वर्ष 1980 और उससे पहले से भी लंबित हैं। अभियुक्त बिना न्याय के जेलों में बंद हैं। बार एसोसिएशन रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार आंदोलन चला है। कुछ अधिवक्ताओं ने इसे लेकर अनशन और आंदोलन तक किए हैं।
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बार कौंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष वीसी मिश्र का कहना है कि जब तक जजों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती है, न्याय दिलाने की बात बेमानी है। समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों का होना आवश्यक है।
हाईकोर्ट में जजों की मौजूदा स्थिति
कुल स्वीकृत पद- 160
वर्तमान जजों की संख्या- इलाहाबाद प्रधानपीठ- 56
लखनऊ खंडपीठ - 20
कुल मौजूदा संख्या- 76
पदों के सापेक्ष कमी- 84
लंबित मुकदमों की संख्या (अक्तूबर 2016)-
इलाहाबाद- 708344
लखनऊ पीठ- 217014
कुल - 925358