फिर उलझ गई अजय नेहरू के जीवित या मृत होने की गुत्थी, कोर्ट में पेश हुए नेहरू को दूसरे पक्ष ने बताया प्रेमचंद
अमरनाथ झा मार्ग प्रयागराज के बंगला नंबर 52/38 व 52 ई के मालिक अजय यशवंत नेहरू के जीवित या मृत होने की गुत्थी एक बार फिर उलझ गई है। इस बार विपक्षी की ओर से पेश हलफनामे ने पूरी कहानी को उलझा दिया है। कुछ दिन पहले ही व्हील चेयर पर अजय यशवंत नेहरू कोर्ट में पेश हुए, तो लगा उनके जीवित या मृत होने की कहानी खत्म हो गई।
मगर दूसरे पक्ष के हलफनामे में कोर्ट में पेश व्यक्ति के अजय नेहरू होने पर ही सवाल उठा दिया है। कहा गया है कि वास्तव में अदालत में पेश हुआ व्यक्ति प्रेमचंद्र साहू है।जिसे नेहरू बनाकर पेश किया गया है। निगाह उनकी करोड़ों की संपत्ति पर है। एक ही नंबर के दो आधार कार्ड भी दाखिल कर दावे को सही साबित करने की कोशिश की गई।
पूरे मामले में आए इस नए मोड़ के बाद सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने अजय नेहरू और प्रेमचंद साहू दोनों को साथ में पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि उन्होने कोर्ट में पेश व्यक्ति के नेहरू होने की पुष्टि नहीं की है बल्कि सुरक्षा देने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से विवादित बंगले का सिलसिलेवार ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया है।और एसडीएम नजूल व नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी को रिकार्ड के साथ तलब किया है।
कोर्ट ने एसएचओ जार्जटाउन को नौ मार्च को हाजिर किए गए अजय यशवंत नेहरू की सुरक्षा बढ़ाने और एसएसपी को प्रेमचंद्र साहू को पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने दूसरे पक्ष को भी मनोज मिश्र के नाम अजय यशवंत नेहरू की आठ जुलाई 2001की पावर आफ अटार्नी भी दाखिल करने को कहा है।
कोर्ट ने महानिबंधक को अमेरिका में रह रहे विश्व प्रकाश श्रीवास्तव व सावित्री श्रीवास्तव पति-पत्नी को याचिका में पक्षकार बनाने का भी आदेश दिया है।और आदेश की प्रति उन्हे ई मेल से अमेरिका भेजने को कहा है। इससे पहले मृत बताए जा रहे जार्जटाउन निवासी अजय यशवंत नेहरू स्वयं को जीवित साबित करने के लिए मंगलवार नौ मार्च को हाईकोर्ट में हाजिर हुए थे। कोर्ट ने उनकी पहचान के कागजात देखकर कहा कि याचिका में लगाए गए फोटो और जो व्यक्ति कोर्ट में उपस्थित है, उनसे ऐसा लगता है कि दोनों एक ही हैं।
अब दूसरे पक्ष ने हलफनामा दाखिल कर कहा कोर्ट में हाजिर अजय यशवंत नेहरू वास्तव मे नेहरू नही है ।वह गौहनिया के प्रमचंद्र साहू हैं।नेहरू की मृत्यु दो साल पहले हो चुकी है और फर्जी व्यक्ति उनके नाम से संपत्ति को कब्जा करने की कोशिश कर रहा है।गुत्थी उलझती ही जा रही है।