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फिर बहिष्कृत की गईं त्रिकाल भवंता
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 27 Dec 2016 02:05 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अखाड़ा परिषद में पैठ बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रहीं महिला धर्म गुरु त्रिकाल भवंता को एक बार फिर निराश होना पड़ा। सोमवार को अखाड़ा परिषद की ओर से आयोजित गंगा पूजन में शामिल होने के लिए जब वह पहुंची तो परिषद के सदस्यों ने एक स्वर में विरोध जताकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बावजूद वह जिद पर अड़ी रहीं। ऐसे में अखाड़े के संतों की अपील पर महिला पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की। वहीं त्रिकाल भवंता ने प्रशासन और अखाड़ा परिषद के संतों पर भेदभाव समेत दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।
महिला धर्मगुरु त्रिकाल भवंता का कहना है कि वह परी अखाड़े की मुखिया की हैसियत से गंगा पूजन में शामिल होने पहुंची थीं लेकिन उन्हें देखते ही अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने उनसे वहां से हटने के लिए कहा। उन्होंने गंगा पूजन का संकल्प दोहराया लेकिन महिला पुलिस बुलाकर उन्हें पूजन से पहले ही वहां से हटा दिया गया। इसके बाद वह मेला प्रशासन कार्यालय पहुंचीं। वह अर्द्ध कुंभ की तैयारियों के लिए होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए भी पहुंची लेकिन वहां भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। डीएम संजय कुमार को ज्ञापन देने पहुंचीं तो उन्होंने भी मिलने से इंकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के दबाव में उन्हें अपमानित किया गया।
‘त्रिकाल भवंता न तो साध्वी हैं और न ही संन्यासिनी। वह किसी अखाड़े से जुड़ी भी नहीं हैं। उन्हें अखाड़ा परिषद की ओर से आयोजित गंगा पूजन और प्रशासन के साथ होने वाली बैठक के लिए आमंत्रित भी नहीं किया गया था। बेहतर होगा कि वह अपनी मर्यादा में रहें। महिला होने का नाजायज फायदा न उठाएं।’
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0 महंत नरेंद्र गिरि,
अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
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महिला धर्मगुरु त्रिकाल भवंता का कहना है कि वह परी अखाड़े की मुखिया की हैसियत से गंगा पूजन में शामिल होने पहुंची थीं लेकिन उन्हें देखते ही अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने उनसे वहां से हटने के लिए कहा। उन्होंने गंगा पूजन का संकल्प दोहराया लेकिन महिला पुलिस बुलाकर उन्हें पूजन से पहले ही वहां से हटा दिया गया। इसके बाद वह मेला प्रशासन कार्यालय पहुंचीं। वह अर्द्ध कुंभ की तैयारियों के लिए होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए भी पहुंची लेकिन वहां भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। डीएम संजय कुमार को ज्ञापन देने पहुंचीं तो उन्होंने भी मिलने से इंकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के दबाव में उन्हें अपमानित किया गया।
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‘त्रिकाल भवंता न तो साध्वी हैं और न ही संन्यासिनी। वह किसी अखाड़े से जुड़ी भी नहीं हैं। उन्हें अखाड़ा परिषद की ओर से आयोजित गंगा पूजन और प्रशासन के साथ होने वाली बैठक के लिए आमंत्रित भी नहीं किया गया था। बेहतर होगा कि वह अपनी मर्यादा में रहें। महिला होने का नाजायज फायदा न उठाएं।’
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0 महंत नरेंद्र गिरि,
अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद