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सरकार ने माना अदालत को दी गलत जानकारियां
Thu, 25 Apr 2019 01:40 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 25 Apr 2019 01:40 AM IST
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court order
- फोटो : amar ujala
मेरठ शहर से रेडलाइट एरिया हटाने की मांग में दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि पहले दाखिल हलफनामे में गलत सूचनाएं दी गई हैं। प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि एक सप्ताह में सही तथ्यों के साथ बेहतर हलफनामा दाखिल किया जाएगा। कोर्ट के यह पूछने पर गलत जानकारी देकर अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों पर सरकार क्या कार्रवाई कर रही है।
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इस पर सरकारी वकील ने बताया कि गलत हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी और कोर्ट को सूचित किया जाएगा।
में मेरठ के डीएम अनिल ढींगरा, एस पी क्राइम डॉ डीपी अशोक और सीएमओ डॉ राज कुमार हाजिर थे। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर इनकी हाजिरी माफ कर दी है। याचिका की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी। अधिवक्ता सुनील चौधरी की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
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इससे पूर्व मेरठ जिला प्रशासन के अधिकारियोें ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया था कि मेरठ में रेड लाइट एरिया बंद करवा दिया गया है और कोई देह व्यापार नहीं चल रहा है। मगर, मीडिया रिपोर्ट से प्रशासन की कलई खुद गई। कोर्ट ने जब सख्ती से पूछताछ की तो अफसरों का झूठ सामने आ गया और सरकारी वकील ने स्वीकार कर लिया कि अदालत को सही सूचनाएं नहीं दी गई हैं।
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याची सुनील चौधरी ने कोर्ट को बताया कि याचिका दाखिल करने के कारण उसे जान से मारने की धमकी मिल रही है। इस पर कोर्ट ने डीएम प्रयागराज को याची की शिकायत पर नियमानुसार तुरंत कार्यवाही करने का निर्देश दिया है और कहा है कि याची आदेश की प्रति के साथ प्रत्यावेदन दे जिसपर डीएम नियमानुसार कार्यवाही करें।