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डिजिटल लाइब्रेरी में बार कोड से खुलेगा कबीर से लेकर निराला तक का हिंदी काव्य संसार

Sun, 22 Aug 2021 08:28 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 22 Aug 2021 08:28 AM IST
सार

  • हिंदुस्तानी एकेडमी की लाइब्रेरी की 18 हजार हिंदी की किताबें होंगी डिजिटल,पेन ड्राइव में डाउनलोड कर घरे ले जाने की मिलेगी सुविधा

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The world of Hindi poetry from Kabir  to Nirala will open in the digital library through bar code
Prayagraj News : हिंदुस्तानी एकेडेमी में किताबों पर लगाया गया बार कोड। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

हिंदुस्तानी एकेडमी का 94 साल पुराना पुस्तकालय डिजिटल होगा। इस पुस्तकालय में संजोई गई हिंदी की पुस्तकों के डिजिटलाइजेशन का काम शुरू कर दिया गया है। इसमें भक्तिकालीन, रीतिकालीन कवियों के महाकाव्य भी शामिल हैं। डिजिटलाइजेशन के साथ ही इस पुस्तकालय की किताबें बार कोड के जरिए कंप्यूटर स्क्रीन पर एक क्लिक में खुलेंगी। शोधार्थियों को किताबें पेन ड्राइव में डाउनलोड कर मुफ्त में घर ले जाने की सुविधा मिलेगी। संगमनगगरी में हिंदी के विकास और संवर्धन के लिए इस एकेडमी की स्थापना 1927 में की गई थी।

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प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के नारे को साकार करने के लिए हिंदुस्तानी एकेडमी ने डिजिटल लाइब्रेरी की योजना बनाई है। पुस्तकों के डिजिटलाइजेशन की जिम्मेदारी यूपी डेस्को को दी गई है। डेस्को ने डिजिट्रोनिक्स की मदद से काम शुरू कर दिया है। इस वर्ष के अंत तक इस पुस्तकालय की कुल 23 हजार से अधिक किताबों को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने की योजना है, ताकि दुर्लभ और अप्रकाशित हो चुके संस्करणों को हमेशा के लिए संरक्षित किया जा सके।

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Prayagraj News : हिंदुस्तानी एकेडेमी में किताबों पर लगाया गया बार कोड। - फोटो : प्रयागराज

फिलहाल नौ हजार किताबों और 10.16 लाख पृष्ठों को डिजिटल किया जा चुका है। जिन किताबों को अब तक डिजिटल कराया जा चुका है, उनमें कबीर का साखी संग्रह, बीजक, अखरावती, अनुराग सागर, भजनमाला, चार खंडों में शब्दावली शामिल हैं। इनके अलावा पद्माकर रचित जगद्विनोद, जगत विनोद, पद्मभरण अलंकार, प्रबोध पचासा, राम रसायन अयोध्याकांड, राम रसायन बालकांड और हिम्मत बहादुर बिरदावल को भी डिजिटल किया जा चुका है।

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Prayagraj News : हिंदुस्तानी एकेडेमी में किताबों पर लगाया गया बार कोड। - फोटो : प्रयागराज
हिंदी खड़ी बोली के प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र के सुंदरी तिलक, कार्तिस्नान, देवी छद्मलीला, भारतेंदु नाटकावली,दुर्लभ बंधु के अलावा मैथिलीशरण गुप्त, रामधारी सिंह दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद और सुमित्रानंदन पंत की कृतियां भी डिजिटल करा ली गई हैं। इनके अलावा सरस्वती, चांद, हिंदुस्तानी पत्रिकाओं के दुर्लभ अंक भी इसमें शामिल किए गए हैं। लाइब्रेरियन रतन कुमार पांडेय बताते हैं कि अब पुस्तकालय में किताबें पढ़ने के लिए कैटलॉग से ढूंढकर नहीं निकाली जाएंगी। अलबत्ता डिजिटल लाइब्रेरी में कंप्यूटर लगाए जाएंगे। बार कोड के जरिए एक क्लिक के साथ ही कंप्यूटर स्क्रीन पर मनचाही किताबें खुल जाएंगी। इसके अलावा पेन ड्राइव में भी इसे शोधार्थी डाउनलोड कर ले जा सकेंगे। व्हाट्सएप पर भी किताबों की पीडीएफ फाइल उपलब्ध हो सकेगी।
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