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अफसरों ने वही दिखाया, जो था सजा-सजाया

Fri, 25 Nov 2016 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 25 Nov 2016 02:25 AM IST
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Officials showed that the punishment was decorated
ह‌र‌िजन पाठशाला - फोटो : amar ujala
आखिर वही हुआ, जिसका अंदेशा था। जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेने बृहस्पतिवार को पहुंची सुप्रीम कोर्ट की टीम को लेकर अफसर वहीं पहुंचे, जहां व्यवस्था बेहतर थी। शहर के नजदीकी स्कूलों में साफ-सफाई समेत अन्य सुविधाएं दुरुस्त करने के लिए पिछले महीने भर से शिक्षा विभाग के अफसर लगे थे। दूरदराज के स्कूलों की ओर रुख तक नहीं किया गया। अफसरों ने टीम को वही दिखाया, जो वे दिखाना चाहते थे।
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जांच टीम शंकरगढ़, मांडा, बारा, करछना, मेजा के उन स्कूलों तक नहीं पहुंची, जो देखने में खंडहर से दिखते हैं। 
अफसरों ने जांच टीम को शहर के आसपास के विकास खंडों बहादुरपुर, चाका एवं जसरा के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक ही सीमित रखा। जांच टीम ने निरीक्षण में शौचालयों, पीने के पानी की व्यवस्था और साफ-सफाई पर फोकस बनाए रखा। निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों गौरव अग्रवाल, अशोक गुप्ता ने सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक रमेश तिवारी एवं बीएसए हरिकेश यादव को विद्यालयों में शौचालय की सफाई के लिए नियमित सफाई कर्मी रखने का सुझाव दिया।
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इसके पहले टीम ने बहादुरपुर ब्लाक के सरपतीपुर, रहिमापुर, नैका महीन, भागीपुर प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया। यहां से चाका एवं जसरा ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय दांदूपुर, रघुवीर का पूरा, मदरहा, सेहुंआ गई। इस तरह से पहले दिन टीम ने कुल 15 विद्यालयों का जायजा लिया। यानी जिले के 2477 प्राथमिक एवं 1001 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से मात्र 15 की ही जांच हो पाई। इन सभी स्कूलों को एचआरए (शहर के नजदीकी) स्कूल कहा जाता है। अब टीम शुक्रवार को जिले के कुछ और विद्यालयों का निरीक्षण करके अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप देगी।
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एक स्वयंसेवी संस्था की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद जिले के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण कर वहां शौचालयों की साफ-सफाई, पानी और बिजली की व्यवस्था पर रिपोर्ट मांगी थी। टीम के सदस्यों गौरव अग्रवाल, अशोक गुप्ता एवं शंकरन को विद्यालयों का स्थलीय सर्वे 24 एवं 25 नवंबर को करना था परंतु दो सदस्य गौरव अग्रवाल एवं अशोक गुप्ता ही आए हैं। जांच टीम के साथ विद्यालयों के निरीक्षण में सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक रमेश तिवारी, बीएसए हरिकेश यादव, मिड-डे मील कोआर्डिनेटर राजीव त्रिपाठी एवं संबंधित खंड शिक्षाधिकारी भी मौजूद रहे।

टीम ने निरीक्षण के दौरान स्कूलों में स्थायी सफाईकर्मी रखने का सुझाव दिया है। टीम ने स्कूल के शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों के साथ अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर शौचालयों की सफाई की क्या व्यवस्था है। इस बात पर सभी की ओर से यही जवाब मिला कि कोई स्थायी सफाईकर्मी नहीं होने के कारण समय-समय पर गांव में मौजूद सफाई वाले को बुलाकर शौचालय साफ करवाया जाता है। जांच टीम ने अफसरों से स्कूलों में स्थायी सफाई कर्मी रखने का सुझाव दिया।

स्कूलों में पीने के पानी के लिए जो हैंडपंप लगे हैं, इसी के पानी का उपयोग शौचालयों में होता है। इससे बच्चों में बीमारी फैलने का डर रहता है। टीम ने विद्यालयों में नल का पानी (रनिंग वाटर) की व्यवस्था कराने का सुझाव दिया। 


प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फैली अव्यवस्था को देखते हुए जांच टीम ने स्कूलों की बाउंड्री बनवाए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इसके लिए जिला विकास समिति के सहयोग से स्कूलों की बाउंड्री बनवाई जाए और टूटी बाउंड्रीवाल ठीक करवाई जाए।
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