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Prayagraj News: डाकिया डाक के साथ डिजिटल सेवा लाया

Fri, 09 Oct 2026 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Fri, 09 Oct 2026 02:28 AM IST
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The postman brought digital services along with the mail.
डाकिया के इतिहास को दर्शाता प्रधान डाकघर के बाहर लगा साइकिल पे सवार डाकिए का स्टैचू। संवाद - फोटो : Archive
कभी साइकिल की घंटी से डाकिया के आने का पता चलता था, जो चिट्ठियों का बंडल लेकर आता था। समय के साथ डाकिया की भूमिका बदल गई है। अब वह डिजिटल डिवाइस के साथ घर बैठे आधार, बैंकिंग और जीवन प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं।
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प्रयागराज शहर में इस समय 206 डाकिये डाक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिनमें आठ महिला डाकिया भी शामिल हैं।प्रधान डाकघर प्रयागराज के प्रवर डाकपाल एके त्रिपाठी बताते हैं कि डाक विभाग का काम अब केवल चिट्ठी और पार्सल पहुंचाने तक सीमित नहीं है। व्यक्तिगत चिट्ठियां घटकर करीब एक फीसदी रह गई हैं।
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वहीं दस्तावेज, कोर्ट नोटिस, आरटीआई आवेदन, किताबें और निमंत्रण पत्र जैसी सेकंड क्लास मेल का चलन पहले के मुकाबले करीब दस गुना बढ़ा है। डिजिटल डिवाइस से लैस डाकिया अब चलता-फिरता मिनी पोस्ट ऑफिस बन गया है। उसके जरिये घर बैठे पांच साल से कम उम्र के बच्चों का नया आधार बनवाने, मोबाइल नंबर अपडेट कराने और पेंशनरों का डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाने जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।
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बैंकिंग सेवा के तहत निर्धारित सीमा तक घर बैठे खाते से नकद निकासी भी की जा सकती है। डाक विभाग की डोरस्टेप सेवा से 155299 पर संपर्क कर घर से ही स्पीड पोस्ट या रजिस्ट्री पार्सल बुक कराया जा सकता है। डाकिया घर पहुंचकर पार्सल लेता है और उसकी रसीद भी देता है। संवाद
डाक पहुंचाने की तकनीक और इतिहास
प्रवर डाकपाल एके त्रिपाठी ने बताया कि प्रयागराज का डाक इतिहास करीब दो शताब्दी पुराना है यहां का डाकघर करीब 1834 से संचालित है और 1881 में बैंकिंग सेवा शुरू हुई। 18 फरवरी 1911 को प्रयागराज के एयर फोर्स स्टेशन से नैनी के बीच दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा दी गई थी।
पायलट हेनरी पिकेट ने करीब 6500 चिट्ठियां पहुंचाई थीं। इस सेवा के सौ वर्ष पूरे होने पर 18 फरवरी 2011 को फिर हेलीकॉप्टर से चिट्ठियां नैनी ले जाई गईं और विशेष पोस्टकार्ड जारी किया गया। डाक विभाग ने 2020 में ई-प्रसादम सेवा शुरू की, जिसके जरिये सौ से अधिक मंदिरों का प्रसाद मंगाया जा सकता है।

गंगाजल सेवा भी उपलब्ध है। नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए 2025 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पहला जेन-जी पोस्ट ऑफिस शुरू किया गया। दुनिया का पहला डाक टिकट पेनी ब्लैक ब्रिटेन में जारी हुआ था।
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