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आनलाइन धार्मिक कर्मकांड करने के निर्णय पर भड़के प्रयागराज संगम के तीर्थ पुरोहित, बोले- किया जाएगा पुरजोर विरोध

Sat, 29 Aug 2020 07:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 29 Aug 2020 07:43 PM IST
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The pilgrimage priests of Prayagraj Sangam raged on the decision to perform religious rituals online, said - will be strongly opposed
prayagraj news - फोटो : prayagraj

अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा प्रयागराज की बैठक में आनलाइन कर्मकांड करने का निर्णय का विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मनुष्यों को भगवान के द्वारा बनाए गए नियम को तोड़ने का अधिकार नहीं है। इससे हिंदू धर्म की परंपरा को ठेस लगेगी। धार्मिक कृत्यों की एक अपनी परंपरा होती है। इसे खिलवाड़ नहीं समझना चाहिए।

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महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्रवण कुमार शर्मा के आवास कीडगंज में हुई बैठक की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चन्द्रनाथ चकहा मधु ने किया। बैठक में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा देश और प्रदेश के सभी तीर्थों में आन लाइन धार्मिक कर्मकांड करने के निर्णय का विरोध किया गया है।

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The pilgrimage priests of Prayagraj Sangam raged on the decision to perform religious rituals online, said - will be strongly opposed
prayagraj news - फोटो : prayagraj

राष्ट्रीय महासचिव चन्द्रनाथ चकहा मधु ने कहा कि ये कोई खिलवाड़ नहीं है। धार्मिक कृत्य की अपनी परंपरा होती है, उन्हीं परंपराओं के आधार पर तीर्थ यात्री प्रत्येक तीर्थ में जाकर नियम पूर्वक धार्मिक कृत्य अनुष्ठान करते हैं। उन्होंने एक छोटा सा उदाहरण दिया कि तीर्थ यात्री अपने मृतक का अस्थि पूजन पिंडदान इत्यादि प्रयागराज आकर विधि अनुसार करता है। आन लाइन पूजा कराने से सैकड़ों हजारों किलोमीटर दूर बैठे यात्री के परिजनों की अस्थि गंगा जी में कैसे विसर्जित होंगी। श्रवण कुमार शर्मा ने कहा कि इसका तीर्थ पुरोहित समाज व्यापक विरोध करेगा।

The pilgrimage priests of Prayagraj Sangam raged on the decision to perform religious rituals online, said - will be strongly opposed
prayagraj news - फोटो : prayagraj

सरकार के इस निर्णय से तीर्थ पुरोहितों का भारी नुकसान होगा। जिसे सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक जी से वार्ता करके इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य की सरकारों को पत्र लिखकर विरोध करने को कहा है। राष्ट्रीय प्रवक्ता अमित राज वैद्य ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद द्वारा दलितों को पंडित बनाए जाने और कर्मकांड कराने की निन्दा की है। उन्होंने कहा कि भगवान द्वारा स्थापित नियम कानूनों को बदलने वाला अभी धरती पर कोई पैदा नहीं हुआ है, और यदि भगवान की परम्परा से छेड़छाड़ मनुष्य करेगा तो उसका गम्भीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।

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The pilgrimage priests of Prayagraj Sangam raged on the decision to perform religious rituals online, said - will be strongly opposed
prayagraj news - फोटो : prayagraj

भगवान ने पृथ्वी पर चार वर्णों की स्थापना की और चारों को उनकी अलग अलग जिम्मेदारी दी है। जिसमें केवल ब्राह्मण को ही अधिकार प्राप्त है कर्मकाण्ड कराने का अन्य तीन वर्णों का नहीं। ब्राह्मण धरती पर भगवान का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रह्म को केवल ब्राह्मण ही समझ सकता है और किसी के बस की बात नहीं है। जो शास्त्र सम्मत है। विश्व हिन्दू परिषद को किसने अधिकार दे दिया की वो देश के धार्मिक कृत्यों का निर्णय करेगा।

 

यदि समय रहते सरकार हस्तक्षेप करके इस निर्णय को वापस नहीं कराती तो समूचे देश के सभी बड़े छोटे तीर्थों के तीर्थ पुरोहितों की राष्ट्रीय संस्था अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन देश के सभी राज्यों में दिल्ली में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने को बाध्य होगी। उक्त अवसर पर संरक्षक हरिजगन्नाथ शास्त्री रामकृष्ण तिवारी श्रवण शर्मा सनद पांडेय रामानंद शर्मा आनन्द त्रिपाठी पवन शास्त्री अनिल मिश्रा दिनेश तिवारी भय्यो महाराज प्रदीप पाठक राजन मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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