{"_id":"350703c0decfce33fac33c54a253091c","slug":"the-nine-hour-blockade-cry-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नौ घंटे तक चक्काजाम ने रुलाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नौ घंटे तक चक्काजाम ने रुलाया
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Thu, 14 May 2015 02:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करछना/नैनी (इलाहाबाद)। बस-बाइक टक्कर में पांच लोगों की मौत के बाद बुधवार सुबह मिर्जापुर मार्ग पर नौ घंटे तक चक्काजाम ने जाम में फंसे लोगों को रुला दिया। भीड़ के पथराव में जाम में फंसी गाड़ियों के कांच टूटे तो उनमें बैठे बच्चों-महिलाओं ने चीखपुकार कर दी। गर्मी में जाम के चलते कई घंटे तक गाड़ियों में फंसे रहने पर बच्चे रोने लगे। किसी तरह दूसरे रास्तों से गाड़ियों को इलाहाबाद और मिर्जापुर की तरफ रवाना किया गया।
इलाहाबाद-मिर्जापुर मुख्य मार्ग पर सुबह करीब पौने दस बजे बस-बाइक भिड़ंत के बाद भीड़ जुटी और कुछ ही देर में चक्काजाम कर दिया। दस बजे से लगा जाम शाम करीब सात बजे भीड़ के हटने के बाद समाप्त हुआ। यानी नौ घंटे तक मिर्जापुर-इलाहाबाद हाइवे पर आवागमन पूरी तरह ठप रहा। बसों, जीप, कार में गर्मी के चलते बच्चे रोने लगे तो महिलाएं भी व्याकुल हो गईं। पानी खत्म होने के साथ ही सवारी गाड़ियों में बैठे लोगों का बुरा हाल हो गया। ऐसे में गाडी चालकों ने पुलिस से पूछकर दूसरे रास्तों पर बढ़ना शुरू किया। मिर्जापुर की तरफ से आ रही गाड़ियों को कोहराड़, करछना होते हुए रामपुर के पास मुख्य मार्ग पर भेजा गया। इलाहाबाद से मिर्जापुर के लिए भी इसी रास्ते को अपनाया गया। जाम लगाए जाने पर कुछ देर तक पनासा मार्ग से गाड़ियां भेजी गईं लेकिन भीड़ ने इस मार्ग पर भी चक्काजाम कर दिया। शाम करीब साढ़े सात बजे तक आवाजाही शुरू हो सकी।
भीरपुर के पास मिर्जापुर मार्ग पर बुधवार सुबह दुखद हादसे में पति-पत्नी और दो बच्चों की मौत से लोग वैसे भी बेहद गमगीन थे। मेजा के चपरतला से मृतक रामबहादुर के परिजनों के आने पर गम और गुस्सा और बढ़ गया था। हादसे का शिकार हुए चार लोगों के शवों के बारे में पूछने पर एक पुलिस अधिकारी ने ऐसा बेहूदा जवाब दिया जिसने लोगों का आक्रोश बढ़ा दिया। इसी के बाद बवाल और पथराव शुरू हो गया था।
विज्ञापन
पौने दस बजे बाइक-बस के बीच भिड़ंत में बाइक सवार रामबहादुर, उसकी पत्नी और दो बच्चों की मौत के कुछ देर बाद जुटे लोगों ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से शवों के बारे में पूछा तो वे टालमटोल करने लगे। करीब घंटे भर बाद रामबहादुर के गांव से परिजनों समेत कई लोग आ गए। कचरी समेत कई गांव के लोग भी जुट गए। स्थानीय लोगों और करछना विधायक दीपक पटेल के मुताबिक, जब भीड ने गुस्सा जताते हुए शवों के जानकारी मांगी तो एक पुलिस अधिकारी ने शाम तक देने के साथ ही कुछ ऐसा खराब शब्द कहा कि लोगों का गुस्सा उबल गया। एक तो लोग वैसे ही दुखी थे। उनका दुख और गुस्सा शांत कराने की बजाय पुलिस अधिकारी ने बदजुबानी कर दी। विधायक दीपक के अनुसार, यही इस बवाल की वजह बनी।
विज्ञापन
इलाहाबाद-मिर्जापुर मुख्य मार्ग पर सुबह करीब पौने दस बजे बस-बाइक भिड़ंत के बाद भीड़ जुटी और कुछ ही देर में चक्काजाम कर दिया। दस बजे से लगा जाम शाम करीब सात बजे भीड़ के हटने के बाद समाप्त हुआ। यानी नौ घंटे तक मिर्जापुर-इलाहाबाद हाइवे पर आवागमन पूरी तरह ठप रहा। बसों, जीप, कार में गर्मी के चलते बच्चे रोने लगे तो महिलाएं भी व्याकुल हो गईं। पानी खत्म होने के साथ ही सवारी गाड़ियों में बैठे लोगों का बुरा हाल हो गया। ऐसे में गाडी चालकों ने पुलिस से पूछकर दूसरे रास्तों पर बढ़ना शुरू किया। मिर्जापुर की तरफ से आ रही गाड़ियों को कोहराड़, करछना होते हुए रामपुर के पास मुख्य मार्ग पर भेजा गया। इलाहाबाद से मिर्जापुर के लिए भी इसी रास्ते को अपनाया गया। जाम लगाए जाने पर कुछ देर तक पनासा मार्ग से गाड़ियां भेजी गईं लेकिन भीड़ ने इस मार्ग पर भी चक्काजाम कर दिया। शाम करीब साढ़े सात बजे तक आवाजाही शुरू हो सकी।
विज्ञापन
भीरपुर के पास मिर्जापुर मार्ग पर बुधवार सुबह दुखद हादसे में पति-पत्नी और दो बच्चों की मौत से लोग वैसे भी बेहद गमगीन थे। मेजा के चपरतला से मृतक रामबहादुर के परिजनों के आने पर गम और गुस्सा और बढ़ गया था। हादसे का शिकार हुए चार लोगों के शवों के बारे में पूछने पर एक पुलिस अधिकारी ने ऐसा बेहूदा जवाब दिया जिसने लोगों का आक्रोश बढ़ा दिया। इसी के बाद बवाल और पथराव शुरू हो गया था।
विज्ञापन
पौने दस बजे बाइक-बस के बीच भिड़ंत में बाइक सवार रामबहादुर, उसकी पत्नी और दो बच्चों की मौत के कुछ देर बाद जुटे लोगों ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से शवों के बारे में पूछा तो वे टालमटोल करने लगे। करीब घंटे भर बाद रामबहादुर के गांव से परिजनों समेत कई लोग आ गए। कचरी समेत कई गांव के लोग भी जुट गए। स्थानीय लोगों और करछना विधायक दीपक पटेल के मुताबिक, जब भीड ने गुस्सा जताते हुए शवों के जानकारी मांगी तो एक पुलिस अधिकारी ने शाम तक देने के साथ ही कुछ ऐसा खराब शब्द कहा कि लोगों का गुस्सा उबल गया। एक तो लोग वैसे ही दुखी थे। उनका दुख और गुस्सा शांत कराने की बजाय पुलिस अधिकारी ने बदजुबानी कर दी। विधायक दीपक के अनुसार, यही इस बवाल की वजह बनी।