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अगले सत्र से लागू होगी ‘स्कूल’ पद्धति

Mon, 05 Sep 2016 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 05 Sep 2016 01:54 AM IST
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The next session will implement a school system
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि वे इस्तीफा देने को हैं तैयार
इलाहाबाद। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में अगले सत्र से ‘स्कूल ऑफ स्टडीज’ की व्यवस्था लागू हो पाएगी। इसे इसी सत्र से लागू करने का निर्णय लिया गया था। संसाधनों की कमी तथा इसी सत्र में क्रेडिट बेस्ड च्वॉयस सिस्टम (सीबीसीएस) को इसी साल लागू करना इसमें बाधा बन गया। इस वजह से इस व्यवस्था को एक साल के लिए टाल दिया गया।
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जेएनयू तथा प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की तरह इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी संकाय के बजाय ‘स्कूल’ में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है। इसका मकसद शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ इन्हें विशेषज्ञ संस्थान के रूप में विकसित करना है। इस मकसद से यहां विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन समेत 15 स्कूल ऑफ स्टडीज बनाने का निर्णय लिया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का भी इसी व्यस्था को आगे बढ़ाने पर जोर है। ऐसे में यूजीसी की ओर से ‘स्कूल ऑफ स्टडीज’ के लिए आर्थिक मदद की घोषणा की गई है। यूजीसी बोर्ड की बोर्ड में इसके लिए फंड भी जारी कर दी है लेकिन विश्वविद्यालय में फिलहाल अध्यापकों तथा संसाधनों की कमी आड़े आ गई है। 
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 ‘स्कूल ऑफ स्टडीज’ के लिए अलग-अलग नए भवनों, लैब आदि की जरूरत होगी। इसके अलावा वर्तमान सत्र में सभी विषयों के परास्नातक कोर्स में सीबीसीएस अनिवार्य कर दिया गया है। अध्यापकाें की कमी के मद्दनेजर अध्यापकों का बड़ा वर्ग सीबीसीएस के विरोध में हैं। कई विभागाध्यक्षों ने तो परास्नातक में सीट घटाने तक की मांग उठाई है। इन पहलुओं को ध्यान में रखकर आगामी सत्र से संकाय को तोड़कर ‘स्कूल ऑफ स्टडीज’ में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया। रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है कि  इसके लिए औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। अगले सत्र से नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
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कालेजों में ‘स्कूल’ पर गवर्निंग बॉडी लेगी निर्णय
 विश्वविद्यालय के संघटक कालेजों में ‘स्कूल ऑफ स्टडीज’ पर गवर्निंग बॉडी निर्णय लेगी। हालांकि कालेजों में विषयों तथा संसाधन की कमी है। ऐसे में वहां इसे लागू करना आसान नहीं होगा।
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