फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The new name of freedom surrounded in controversy again JNU

नई आजादी के नाम पर फिर विवादों में घिरा जेएनयू

Wed, 06 Apr 2016 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 06 Apr 2016 02:02 AM IST
विज्ञापन
The new name of freedom surrounded in controversy again JNU
कन्हैया की घर वापसी - फोटो : Amar Ujala
केंद्र सरकार की रैंकिंग में जेएनयू भले ही तीसरे स्थान पर हो लेकिन इन दिनों यह संस्थान सिर्फ विवादों के लिए चर्चित है। जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया को लेकर चल रहा विवाद अभी थमा भी नहीं कि इलाहाबाद आए जेएनयू के प्रोफेसर रवि श्रीवास्तव ने जेएनयू में चल रही गतिविधियों को नई आजादी के लिए संघर्ष बताकर एक और विवाद को जन्म दे दिया। हालांकि जेएनयू के इन विवादित छात्रों की उम्र से भी अधिक समय से कई मुद्दों पर संघर्षरत कर्मचारी और मजदूर नेताओं को प्रोफेसर का यह बयान रास नहीं आया। उनका कहना है कि आजादी के नाम पर राजनीति ठीक नहीं और न ही उन लोगों को महिमा मंडित करने की जरूरत है जो इसकी आड़ में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। 
विज्ञापन


वाम विचारधारा के आल इंडिया किसान मजदूर सभा (एआईकेएमएस) के इलाहाबाद में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने आए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर रवि श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान में जेएनयू और हैदराबाद स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों ने हाल के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि इन छात्रों  ने नई आजादी के लिए संघर्ष का बिगुल छेड़ा है। वे आज गरीबी, भुखमरी, जातीय एवं लैंगिक शोषण से आजादी, स्वायत्त रूप से सोचने और उस पर अमल करने की आजादी, सामंतवाद एवं पूंजीवादी लूट से आजादी की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन


ये नारे अब देश के अन्य विश्वविद्यालयों जैसे, जाधवपुर एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी गूंज रहे हैं। उनके इस बयान पर आल इंडिया ऑडिट ऐंड एकाउंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र पांडेय का कहना है कि हमें तो महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, अशफाक उल्ला खां बहुत पहले ही आजादी दिला चुके हैं। बात अब व्यवस्था में सुधार की होनी चाहिए। नई आजादी के नाम पर आतंकियों के हितैषी और राष्ट्रदोहियों को महिमामंडित करने की जरूरत नहीं है। एजी ऑफिस में 20 साल से कार्यरत तमाम दैनिक वेतन भोगी विनियमित किए जा चुके हैं और जो नहीं हुए हैं, उनके लिए संघर्ष किया जा रहा है। इसी तरह कई मुद्दों पर संघर्ष जारी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अपने आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए ऐसे संघर्षों का उदाहरण दें, जो राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की श्रेणी में आते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष केपी दुबे का कहना है कि किसी भी संगठन का सम्मेलन हो, विषय से हटकर जेएनयू जैसे विवादित मुद्दे को और अधिक विवादित बना देना सरासर गलत है। यह राष्ट्रदोह की श्रेणी में आता है और ऐसे लोगों का समर्थन करने वाले भी। संघ के विभाग प्रमुख राधेश्याम पांडेय का कहना है कि जेएनयू के प्रोफेसर श्रीवास्तव उनको महिमा मंडित कर रहे हैं जो आतंकियों को अपना हीरो मानते हैं। उन्हें सोचना चाहिए कि अगर राष्ट्र पर ही संकट आ जाएगा तो किसी का वजूद सुरक्षित नहीं रह जाएगा।


जेएनयू के प्रोफेसर रवि श्रीवास्तव इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वीसी के दावेदारों में भी शामिल थे। भारतीय मजदूर संघ के विभाग प्रमुख राधेश्याम पांडेय का कहना है कि प्रोफेसर श्रीवास्तव जैसी मानसिकता वाले लोग अगर इविवि के वीसी बन जाते तो यहां भी एक जेएनयू और कई कन्हैया नजर आते। शायद यही वजह रही होगी कि सरकार ने प्रो. रतन लाल हांगलू को तरजीह दी और उन्हें वीसी बनाया। बतौर वीसी वह अच्छा काम भी कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed