फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The last journey was undertaken on the shoulders of those on whose wrists Rakhi was tied.

Prayagraj News: जिनकी कलाइयों में बांधी राखी... उन्हीं के कंधों पर तय की अंतिम यात्रा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:42 AM IST
विज्ञापन
The last journey was undertaken on the shoulders of those on whose wrists Rakhi was tied.
जिन दो छोटे भाइयों की कलाई पर अधिवक्ता जागृति शुक्ला राखी बांधा करती थीं, मंगलवार को उन्हीं के कंधों पर सवार होकर दुनिया से अपनी अंतिम यात्रा तय की। जागृति के छोटे भाई अभिषेक और ओम ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें लाडली बहन को घर से ऐसे बेजान शरीर में विदा करना होगा। बहन का शव उठाने में दोनों के हाथ कांप रहे थे।
विज्ञापन

भाइयों के साथ ही पिता पंकज शुक्ला ने भी कंधा दिया। बुढ़ापे में बेटी का पार्थिव शरीर उठाते वक्त मानो उन पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। अंतिम विदाई देते वक्त उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मुखाग्नि पिता ने दी। मां उमा शुक्ल तो घर में ही बेसुध पड़ी रहीं।
विज्ञापन

जागृति के पार्थिव शव का अंतिम संस्कार दारागंज के श्मशान घाट पर किया गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में हाईकोर्ट के अधिवक्ता मौजूद रहे। लखनऊ के एसजीपीजीआई में उपचार के दौरान जागृति की मौत के बाद सोमवार शाम 5:30 बजे शव घर पहुंचा था। मंगलवार सुबह सात बजे उनकी अंतिम यात्रा दारागंज श्मशान घाट के लिए शुरू हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

मूलरूप से फूलपुर के वीरकाजी गांव निवासी पवन शुक्ला पिछले डेढ़ दशक से झूंसी के तुलापुर गांव में रह रहे हैं। पवन शुक्ला अलोपीबाग स्थित सिंधु विद्या मंदिर स्कूल में वाहन चालक हैं। उनके तीन बच्चों में जागृति सबसे बड़ी थीं। सीएमपी डिग्री कॉलेज से एलएलबी की परीक्षा पास करने के बाद जागृति हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रही थीं। दो भाइयों में इकलौती बहन होने के कारण पूरे परिवार की लाडली थीं। उनका सपना सिविल जज बनकर माता-पिता के सपने को साकार करना था। 20 मई की सुबह हुए हादसे की वजह से जागृति के परिवार के सपने हमेशा के लिए यादों दफन हो गए।


पिता को रिश्तेदारों ने संभाला
पिता पवन शुक्ला तो यह कहकर बिलख पड़े कि जिस बिटिया को डोली में विदा करना था, उसके शव को कंधा देना पड़ रहा है। रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। दादा रविंद्र और दादी निर्मला शुक्ला ने भी पोती को भारी मन से विदा किया।



कई थानों की पुलिस रही तैनात
दारागंज श्मशान घाट पर हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंह, महासचिव अखिलेश शर्मा, उपाध्यक्ष अमित सिंह सोनू, राय साहब यादव, रवि श्रीवास्तव, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, आलोक मिश्र, राज सिंह आदि मौजूद रहे। सुरक्षा के लिहाज से एसीपी झूंसी कुंजलता के साथ ही कई थानों की पुलिस फोर्स दारागंज श्मशान घाट पर मौजूद रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed