कन्हैया की तुलना भगत सिंह से करना नासमझी
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उन्होेंने कहा कि ‘भारत माता की जय’ और ‘जय हिंद’ के नारों को लेकर राजनीति करना गलत है। यह तो देशभक्ति की भावना है, जिसे आप किसी पर थोप नहीं सकते हैं। नारे लगाना और न लगाना देशभक्ति का पैमाना नहीं हो सकता। आज के युवाओं को भगत सिंह के विचारों को आत्मसात करना चाहिए। हर वर्ष भगत सिंह की शहादत दिवस पर उनकी प्रतिमा, तस्वीरों पर फूल मालाएं चढ़ा दी जाती हैं, जबकि जरूरत तो इस बात की है कि लोग उनके विचारों का अपनाएं, देश के लिए उनके देखे सपनों को पूरा करने की दिशा में काम करें। यहीं उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
भगत सिंह का संघर्ष व्यवस्था के खिलाफ था। उनका सपना था कि देश में समानता हो, किसी तरह का भेदभाव न हो, मगर आजादी के इतने वर्षों बाद आज भी उनका सपना साकार नहीं हो सका है। सरकारों को इस दिशा में काम करना होगा।
वहीं सरकार द्वारा अभी तक भगत सिंह को शहीद का दर्जा न दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिसे पूरा देश शहीद-ए-आजम मानता हो, उसे किसी सरकारी उपाधि की जरूरत नहीं है। भगत सिंह तो लोगों के दिलों में बसते हैं। बता दें कि मानव अधिकार कार्यकर्ता अभितेज सिंह संधू सरदार कुलबीर सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के जरिए शिक्षा का अधिकार, स्वास्थ्य और लोगों को नशे से दूर करने की दिशा में काम करते हैं। वह शहर में एक कार्यक्रम में शरीक होने आए थे।