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Prayagraj News: माैनी अमावस्या हादसे में न्यायिक आयोग की टीम ने 15 पुलिसकर्मियों के दर्ज किए बयान
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महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुए हादसे की जांच के लिए सोमवार को न्यायिक आयोग की टीम तीसरी बार प्रयागराज पहुंची। साथ ही उस दिन ड्यूटी पर तैनात 15 पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए। 12 मार्च तक यहां रहकर न्यायिक आयोग की टीम अन्य पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के बयान समेत अन्य साक्ष्यों की जांच पड़ताल करेगी। इस माह के अंत तक आयोग की ओर से तैयार रिपोर्ट सरकार को साैंपे जाने की संभावना है।
सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग में रिटायर्ड आईएएस दिनेश कुमार सिंह और रिटायर्ड आईपीएस वीके गुप्ता तीन दिन के प्रवास पर सोमवार को दोपहर बाद सर्किट हाउस पहुंचे, जहां बयान देने के लिए घटना के दिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी मौजूद थे। शाम तक करीब 15 से अधिक पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए। इसमें सिपाही और दरोगा शामिल थे।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सर्किट हाउस में दिनभर चली जांच और 15 पुलिसवालों से पूछताछ के बाद भी न्यायिक आयोग को कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। पुलिस कर्मियों ने अपने बयान में जो बात बताई है, उसमें संगम नोज के अलावा मेला क्षेत्र में अन्य स्थानों पर भगदड़ में जनहानि की जानकारी आयोग को नहीं दी गई है। बताया जा रहा है कि जिन पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए उनकी तैनाती संगम नोज पर थी भी नहीं। वहीं पुलिस के किसी बड़े अफसर का बयान अभी दर्ज नहीं हो सका है, हालांकि न्यायिक आयोग की टीम ने उनसे घटना के संबंध में पहले जानकारी ली है। साथ ही अफसरों के साथ घटनास्थल का भी मुआवना किया है।
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विदित हो कि मेला प्रशासन की ओर से माैनी अमावस्या पर हुए हादसे में 30 श्रद्धालुओं के माैत की जानकारी दी गई है, जबकि हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मृतकों की संख्या कहीं अधिक होने की आशंका जताई गई है। इसे लेकर तमाम बिंदुओं पर न्यायिक आयोग की टीम जांच कर रही है।
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सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग में रिटायर्ड आईएएस दिनेश कुमार सिंह और रिटायर्ड आईपीएस वीके गुप्ता तीन दिन के प्रवास पर सोमवार को दोपहर बाद सर्किट हाउस पहुंचे, जहां बयान देने के लिए घटना के दिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी मौजूद थे। शाम तक करीब 15 से अधिक पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए। इसमें सिपाही और दरोगा शामिल थे।
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अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सर्किट हाउस में दिनभर चली जांच और 15 पुलिसवालों से पूछताछ के बाद भी न्यायिक आयोग को कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। पुलिस कर्मियों ने अपने बयान में जो बात बताई है, उसमें संगम नोज के अलावा मेला क्षेत्र में अन्य स्थानों पर भगदड़ में जनहानि की जानकारी आयोग को नहीं दी गई है। बताया जा रहा है कि जिन पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए उनकी तैनाती संगम नोज पर थी भी नहीं। वहीं पुलिस के किसी बड़े अफसर का बयान अभी दर्ज नहीं हो सका है, हालांकि न्यायिक आयोग की टीम ने उनसे घटना के संबंध में पहले जानकारी ली है। साथ ही अफसरों के साथ घटनास्थल का भी मुआवना किया है।
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विदित हो कि मेला प्रशासन की ओर से माैनी अमावस्या पर हुए हादसे में 30 श्रद्धालुओं के माैत की जानकारी दी गई है, जबकि हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मृतकों की संख्या कहीं अधिक होने की आशंका जताई गई है। इसे लेकर तमाम बिंदुओं पर न्यायिक आयोग की टीम जांच कर रही है।