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शिल्प ग्राम में बिखरी लोकनृत्यों की इंद्रधनुषी छटा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2014 01:45 AM IST
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इलाहाबाद। सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रीय शिल्प मेले की बृहस्पतिवार को लोकनृत्यों की इंद्रधनुषी छटा बिखरी। विभिन्न प्रांतों के आए शिल्प को खरीदने, व्यंजनों का स्वाद लेने के साथ ही लोगों ने मुक्ताकाशी के मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत संगमनगरी के युवा गायक गौरव पाराशरी के गायन से हुई। नुसरत फतेह अली खान की बंदिश ‘अल्ला हू-अल्ला हू’ और अमीर खुसरो की बंदिश ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाए के’ को श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मणिपुर से आए इबोमचा एवं दल द्वारा ‘लाई हरोवा’ के जरिए मणिपुर की प्राचीन संस्कृति की झलक तो वहीं ‘ढोल चोलम’ में ढोल वादों की निपुणता और कुशलता देखने को मिली।
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‘थांग यन्नावा’ व ‘थांग अहूम यन्नावा’ नृत्य के माध्यम से परंपरागत युद्ध कला को दिखाया गया। राजस्थान के शंकरदास एवं दल ने कामड़ समुदाय का धार्मिक नृत्य ‘तेराताली’ और मप्र के डिण्डौरी से आए अर्जुन सिंह धुर्वे के दल ने वैगा जनजाति का ‘परधौनी’ नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
महाराष्ट्र के कलाकारों ने लावणी, पंजाबी के अमरेंद्र सिंह के दल ने भांगड़ा एवं गिद्दा के जरिए दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। उत्तराखंड के कुसुम नेगी के दल ने ‘हारुल’ लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी।
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सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत संगमनगरी के युवा गायक गौरव पाराशरी के गायन से हुई। नुसरत फतेह अली खान की बंदिश ‘अल्ला हू-अल्ला हू’ और अमीर खुसरो की बंदिश ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाए के’ को श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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मणिपुर से आए इबोमचा एवं दल द्वारा ‘लाई हरोवा’ के जरिए मणिपुर की प्राचीन संस्कृति की झलक तो वहीं ‘ढोल चोलम’ में ढोल वादों की निपुणता और कुशलता देखने को मिली।
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‘थांग यन्नावा’ व ‘थांग अहूम यन्नावा’ नृत्य के माध्यम से परंपरागत युद्ध कला को दिखाया गया। राजस्थान के शंकरदास एवं दल ने कामड़ समुदाय का धार्मिक नृत्य ‘तेराताली’ और मप्र के डिण्डौरी से आए अर्जुन सिंह धुर्वे के दल ने वैगा जनजाति का ‘परधौनी’ नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
महाराष्ट्र के कलाकारों ने लावणी, पंजाबी के अमरेंद्र सिंह के दल ने भांगड़ा एवं गिद्दा के जरिए दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। उत्तराखंड के कुसुम नेगी के दल ने ‘हारुल’ लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी।