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निरस्त होगा प्रधानाचार्य का साक्षात्कार
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 10 Feb 2015 11:30 PM IST
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प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से जून 2014 में हुआ साक्षात्कार निरस्त होगा। शासन ने चयन बोर्ड के तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. आशाराम की ओर से मनमाने तरीके से कराए गए साक्षात्कार को जून में स्थगित करने के साथ निरस्त करने की सिफारिश की गई थी। शासन की ओर से साक्षात्कार निरस्त करने की सिफारिश के बाद भी चयन बोर्ड के तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष ने बात नहीं मानी। इसके बाद से साक्षात्कार की वैधानिकता को लेकर गतिरोध बना हुआ था।
चयन बोर्ड की ओर से दो जून से 24 जून के बीच आजमगढ़, मिर्जापुर, आगरा और कानपुर मंडल के माध्यमिक विद्यालयों के लिए संस्था प्रमुखों का चुनाव करवाया गया था। चयन बोर्ड के तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर से साक्षात्कार की सूची तैयार करने में हेरफेर करने तथा साक्षात्कार तिथि से 21 दिन पहले इंटरव्यू लेटर जारी नहीं करने के विरोध में चयन बोर्ड की तत्कालीन सचिव ने विरोध कर दिया था। सचिव के विरोध को देखते प्रदेश के तत्कालीन प्रमुख सचिव माध्यमिक ने साक्षात्कार की प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश दिया था।
शासन के आदेश को गंभीरता से नहीं लेने के कारण तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष को हटाकर चयन बोर्ड में नए सचिव और अध्यक्ष की तैनाती की थी। इसके बाद भी चयन बोर्ड की ओर से साक्षात्कार के संबंध में निर्णय नहीं लिए जाने के बाद प्रमुख सचिव माध्यमिक की ओर से साक्षात्कार की तिथि तय करने के लिए 10 फरवरी को बैठक बुलाई गई थी। बैठक के दौरान प्रमुख सचिव माध्यमिक ने कहा कि चयन बोर्ड की तत्कालीन सचिव नीना श्रीवास्तव के साक्षात्कार निरस्त करने की सिफारिश को शासन ने मानते हुए अपनी मुहर लगा दी। बैठक में शामिल चयन बोर्ड के सदस्य ललित कुमार श्रीवास्तव ने इस बात की पुष्टि की कि शासन ने अध्यक्ष से साक्षात्कार निरस्त करने के आदेश को अमल करने को कहा है।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को अपने तरीके से चलाने वाले डॉ. आशाराम यादव का चार फरवरी को कार्यकाल पूरा होने के बाद आखिरकार शासन ने दो से 24 जून के बीच हुआ प्रधानाचार्य का साक्षात्कार निरस्त कर दिया। प्रदेश सरकार एवं शासन को आंख दिखाने वाले डॉ. आशाराम ने आखिरकार अपनी तैनाती की अवधि तक साक्षात्कार निरस्त नहीं होने दिया।
शासन की ओर से प्रधानाचार्य के साक्षात्कार की विसंगति दूर करते हुए निर्देश दिया गया कि अब साक्षात्कार में अलग-अलग बोर्डों के अध्यक्ष ही नंबर नहीं देंगे। साक्षात्कार में अब औसत का कानून लागू किया जा रहा है। साक्षात्कार के दौरान बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों के साथ विशेषज्ञों को भी बराबर अंक देने की छूट रहेगी। अंतिम अंक देते समय औसत अंक निकाला जाएगा। शासन की इस पहल से अब साक्षात्कार में मनमानी नहीं चलेगी।
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चयन बोर्ड की ओर से दो जून से 24 जून के बीच आजमगढ़, मिर्जापुर, आगरा और कानपुर मंडल के माध्यमिक विद्यालयों के लिए संस्था प्रमुखों का चुनाव करवाया गया था। चयन बोर्ड के तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर से साक्षात्कार की सूची तैयार करने में हेरफेर करने तथा साक्षात्कार तिथि से 21 दिन पहले इंटरव्यू लेटर जारी नहीं करने के विरोध में चयन बोर्ड की तत्कालीन सचिव ने विरोध कर दिया था। सचिव के विरोध को देखते प्रदेश के तत्कालीन प्रमुख सचिव माध्यमिक ने साक्षात्कार की प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश दिया था।
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शासन के आदेश को गंभीरता से नहीं लेने के कारण तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष को हटाकर चयन बोर्ड में नए सचिव और अध्यक्ष की तैनाती की थी। इसके बाद भी चयन बोर्ड की ओर से साक्षात्कार के संबंध में निर्णय नहीं लिए जाने के बाद प्रमुख सचिव माध्यमिक की ओर से साक्षात्कार की तिथि तय करने के लिए 10 फरवरी को बैठक बुलाई गई थी। बैठक के दौरान प्रमुख सचिव माध्यमिक ने कहा कि चयन बोर्ड की तत्कालीन सचिव नीना श्रीवास्तव के साक्षात्कार निरस्त करने की सिफारिश को शासन ने मानते हुए अपनी मुहर लगा दी। बैठक में शामिल चयन बोर्ड के सदस्य ललित कुमार श्रीवास्तव ने इस बात की पुष्टि की कि शासन ने अध्यक्ष से साक्षात्कार निरस्त करने के आदेश को अमल करने को कहा है।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को अपने तरीके से चलाने वाले डॉ. आशाराम यादव का चार फरवरी को कार्यकाल पूरा होने के बाद आखिरकार शासन ने दो से 24 जून के बीच हुआ प्रधानाचार्य का साक्षात्कार निरस्त कर दिया। प्रदेश सरकार एवं शासन को आंख दिखाने वाले डॉ. आशाराम ने आखिरकार अपनी तैनाती की अवधि तक साक्षात्कार निरस्त नहीं होने दिया।
शासन की ओर से प्रधानाचार्य के साक्षात्कार की विसंगति दूर करते हुए निर्देश दिया गया कि अब साक्षात्कार में अलग-अलग बोर्डों के अध्यक्ष ही नंबर नहीं देंगे। साक्षात्कार में अब औसत का कानून लागू किया जा रहा है। साक्षात्कार के दौरान बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों के साथ विशेषज्ञों को भी बराबर अंक देने की छूट रहेगी। अंतिम अंक देते समय औसत अंक निकाला जाएगा। शासन की इस पहल से अब साक्षात्कार में मनमानी नहीं चलेगी।