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कैराना से हिंदुओं के पलायन पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी

Fri, 20 Jan 2017 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 20 Jan 2017 01:48 AM IST
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The High Court sought information on the migration of Hindus from Kairana
court shimla
शामली जिले के कैराना और मुजफ्फनगर के आसपास शोहदों और दबंगों के डर से हिंदुओं के पलायन पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी है। इस मामले को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि इलाके के हिंदू परिवारों का पलायन रोकने और जो लोग घर छोड़कर जा चुके  हैं उनको वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
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याचिका सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश कुमार खुराना ने दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि कैराना और मुजफ्फरनगर से पलायन के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय स्वयं हस्तक्षेप करे और वहां की स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए कदम उठाए। पलायन और क्षेत्र में अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ हो रही आपराधिक घटनाओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता वीसी मिश्र ने कहा कि धर्म विशेष के कुछ दबंग लोगों से आतंकित होकर हिंदू पलायन कर रहे हैं। उनके साथ मारपीट, लूट, बलात्कार और हत्या की घटनाएं हो रही हैं। राजनैतिक कारण से सरकार अराजकतत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
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उन्होंने कहा कि प्रमुख सचिव भारत सरकार, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार, प्रमुख सचिव गृह यूपी, डीजीपी यूपी और जिला प्रशासन को निर्देश दिया जाए कि पीड़ित लोगों की प्राथमिकी दर्ज कर कानून के मुताबिक कार्य करने की व्यवस्था करें। पीड़ित परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई।
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मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर कोर्ट गंभीर

याचिका के साथ मानवाधिकार आयोग की एक जांच रिपोर्ट भी संलग्न की गई है। बताया गया कि स्थानीय सांसद हुकुम सिंह और सुप्रीमकोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा की शिकायत पर आयोग ने जांच शुरू की। इसकी रिपोर्ट आ गई है। इसमें 346 पीड़ित परिवारों की सूची दी गई है जिसमें से अधिकांश ने घर छोड़ा है। आयोग की रिपोर्ट से स्थिति की गंभीरता का पता चलता है। इसके बावजूद पुलिस कोई कदम नहीं उठा रही है। आयोग की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कैराना थाने में इस मामले में जो भी मुकदमे दर्ज हैं उनकी निष्पक्ष जांच के लिए सीबीसीआईडी को स्थानांतरित कर दिया जाए। क्षेत्र में आपसी सौहार्द्र कायम करने और घर छोड़ने वाले लोगों को वापस लाने के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन का भी सुझाव रिपोर्ट में दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि यदि याचिका में उठाई गई बातें सही तो यह काफी गंभीर मामला है। प्रदेश सरकार से दो फरवरी तक मामले की पूरी जानकारी मांगी है। अगली सुनवाई दो फरवरी को होगी।
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