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हाईकोर्ट ने कहा, वेतन आयोग की सिफारिशें लागू न करना औचित्यहीन
Mon, 18 Feb 2019 12:45 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 18 Feb 2019 12:45 AM IST
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delhi high court
- फोटो : PTI
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से संबद्ध स्नातकोत्तर डिग्री कॉलेज में मानदेय पर कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसरों को सातवें वेतन आयोग द्वारा निर्धारित वेतनमान का न्यूनतम वेतन देने का निर्देश दिया है, किंतु इन्हें भत्ते नहीं मिलेंगे। कोर्ट ने कहा है कि सरकार इन्हें छठे वेतन आयोग द्वारा तय वेतनमान का न्यूनतम वेतन का भुगतान कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि नियमित एसो. प्रोफेसरों का वेतनमान बढ़ने पर मानदेय एसो. प्रोफेसरों का भी वेतन बढ़ जाएगा।
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कोर्ट ने कहा है कि सरकार मानदेय शिक्षकों को नियमित करने पर विचार कर रही है। ऐसे में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मानदेय शिक्षकों पर लागू करने से इंकार करने का औचित्य नहीं है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने डॉ. गणेश दीक्षित एवं दो अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
सरकार का कहना था कि मानदेय शिक्षकों को न्यूनतम वेतन के साथ डीए भी दिया जा रहा है। जो समय-समय पर बढ़ रहा है। सातवें वेतन आयोग मानदेय शिक्षकों पर लागू नहीं है। यह केवल नियमित शिक्षकों पर ही लागू है। किंतु कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना और कहाकि मानदेय शिक्षक याचियों को सातवें वेतन आयोग द्वारा तय वेतनमान का न्यूनतम वेतन पाने का अधिकार है।
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