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माघ मेले में बाढ़ का संकट फिलहाल टला,  प्रशासन को राहत

Tue, 09 Feb 2021 12:45 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 09 Feb 2021 12:45 AM IST
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The flood crisis in the Magh Mela is currently averted, the administration is relieved
prayagraj news : माघ मेले में मौनी अमावस्या की तैयारी में जुटा प्रशासन। - फोटो : prayagraj

उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने की वजह से प्रयागराज में संभावित बाढ़ का संकट फिलहाल टल गया है। सोमवार को प्रयागराज प्रशासन को सूचना मिली कि हरिद्वार में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है। वहां उत्तराखंड सरकार एवं स्थानीय प्रशासन ने पानी का ज्यादा प्रभाव आगे नहीं बढ़ने दिया है। ऐसे में अब प्रयागराज के माघ मेले में अब कोई संकट नहीं है। साथ ही प्रयागराज में गंगा किनारे रह रहे हजारों कल्पवासियों को भी इससे बड़ी राहत मिली है। 

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उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद रविवार दोपहर से ही प्रयागराज में हड़कंप मचा हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा को देखते हुए प्रयागराज प्रशासन ने यहां माघ मेला क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया था। लेकिन सोमवार को उत्तराखंड से जो खबर आई है वह राहत देने वाली है। एडीएम वित्त एवं राजस्व व प्राकृतिक आपदा एमपी सिंह ने बताया कि प्रशासन की टीम रविवार से लगातार उत्तराखंड के अफसरों से संपर्क बनाए हुए हैं। आज खबर मिली कि अभी पानी हरिद्वार तक ही नहीं आया है।

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The flood crisis in the Magh Mela is currently averted, the administration is relieved
prayagraj news : माघ मेला - फोटो : prayagraj
ऐसे में प्रयागराज में मौनी अमावस्या या उसके बाद बसंत पंचमी पर भी अब पानी आने की संभावना नहीं है।  उत्तराखंड सरकार ने अपने प्रयास से तमाम नहरों में पानी छोड़कर प्राकृतिक आपदा की रोकथाम पहले ही कर ली है। ऐसे में अब गंगा में पानी बढ़ने की उम्मीद बहुत कम है। फिलहाल हरिद्वार से आई सूचना ने प्रशासन के साथ ही यहां रह रहे हजारों कल्पवासियों, संतों, संस्थाओं एवं शहरियों को राहत दी है। 

बाढ़ आती तो 500 फीट का दायरा होता प्रभावित

प्रयागराज में इस समय माघ मेला चल रहा है। यहां पौष पूर्णिमा से हजारों की संख्या में कल्पवासी गंगा किनारे टेंट में रह रहे हैं। सैकड़ों कल्पवासियों को मेला प्रशासन ने गंगा के करीब जमीन आवंटित है। ऐसे में अगर उत्तराखंड में आई आपदा के बाद गंगा में पानी बढ़ता तो बाढ़ की स्थिति में तट से 500 फीट का दायरा प्रभावित होना लगभग तय था। इस वजह से वहां रह रहे लोगों को मेला प्रशासन द्वारा हटाना पड़ता। क्योंकि माघ मेला का सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या महज दो दिन के बाद है इस वजह से मेला प्रशासन भी पशोपेश में था कि वह क्या करे। अब हरिद्वार से आई सूचना ने मेला प्रशासन को बड़ी राहत दे दी है।
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