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इलाहाबाद में इमरजेंसी से पहले ही टूट गया था कांग्रेस का तिलिस्म

Sun, 24 Mar 2019 12:58 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 24 Mar 2019 12:58 AM IST
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The emergency of the Congress was broken before the Emergency in Allahabad
vp singh - फोटो : vp singh
इमरजेंसी के बाद 1977 के चुनाव में कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में जड़ से सफाया हो गया था, लेकिन इलाहाबाद में इमरजेंसी से पहले ही कांग्रेस का तिलिस्म टूट गया था और इसे तोड़ने वाले थे जनेश्वर मिश्र, जिन्होंने इमरजेंसी से पहले हुए उपचुनाव में भारतीय क्रांति दल के टिकट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे एवं शहर के जाने-माने अधिवक्ता सतीश चंद्र खरे को पराजित किया था।
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1971 के लोकसभा चुनाव में सांसद निर्वाचित हुए हेमवती नंदन बहुगुणा 1974 के विधानसभा चुनाव में बारा से विधायक निर्वाचित हुए और इंदिरा गांधी ने उन्हें यूपी का मुख्यमंत्री बना दिया। 1971 तक इलाहाबाद संसदीय सीट लगातार कांग्रेस के पास थी। बहुगुणा के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीट खाली हो गई और उपचुनाव में जनेश्वर मिश्र ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका था।
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इसके बाद इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस पूरे प्रदेश में धराशायी हो गई। इलाहाबाद से जनेश्वर मिश्र भारतीय लोक दल और विश्वनाथ प्रताप सिंह कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे थे। चुनाव में जनेश्वर मिश्र ने 89 हजार 988 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। इस चुनाव में जनेश्वर मिश्र को एक लाख 90 हजार 697 वोट और विश्वनाथ प्रताप सिंह को एक लाख 709 वोट मिले थे।
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इमरजेंसी के दौरान अटल बिहारी बाजपेयी के साथ तीन माह भोपाल जेल में बंद रहे कर्मचारी नेता कृपा शंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि 1977 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीडी टंडन पार्क में अटल बिहारी वाजपेयी की जनसभा होनी थी। 50 हजार की भीड़ उन्हें सुनने के लिए पार्क के आसपास जुटी थी। अटल जी को वाराणसी, भदोही से होते हुए शाम छह बजे तक इलाहाबाद आना था। इंतजार करते-करते रात के 12 बजे बज गए। भीड़ वहां से हिलने को तैयार नहीं थी। आखिर रात दो बजे अटलजी वहां पहुंचे और उन्होंने लोगों को संबोधित किया। मंच पर कृपा शंकर के साथ हेमवती नंदन बहुगुणा, जगजीवन राम भी शामिल थे। सभी कांग्रेस छोड़कर आए थे। अटल जी ने इमरजेंसी के दौरान हुए अत्याचार का हवाला देते हुए कांग्रेस को हराने का आह्वान किया और इस चुनाव में कांग्रेस को पूरे प्रदेश से सफाया हो गया।

किसे कितने मिले थे वोट
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जनेश्वर मिश्र (बीएलडी) - 190697
विश्वनाथ प्रताप सिंह (कांग्र्रेस) - 100709
ओम प्रकाश निराला (एचएमएस) - 14761
कृपाल सिंह (निर्दलीय) - 7363
गोविंद मिश्र (निर्दलीय) - 4297 
अमर नाथ (निर्दलीय) - 3264
छबिनाथ तिवारी (निर्दलीय) - 3187
राधे श्याम (निर्दलीय) - 2028
जगन्नाथ पाल (निर्दलीय) - 1741
अल्ला खान (निर्दलीय) - 1304
राम इकबाल शर्मा (निर्दलीय) - 1068
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