फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The elephant got angry at the royal bath, was tied in the Muslim colony of Jhunsi for two months

Mahakumbh : शाही स्नान पर भड़क गया था हाथी, झूंसी की मुसलिम बस्ती में दाे महीने तक था बंधा

Sun, 08 Dec 2024 12:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 08 Dec 2024 12:43 PM IST
सार

झूंसी कोहना की मुसलिम बस्ती के 70 वर्षीय रईस अहमद और 65 वर्षीय नौशाद अहमद बताते हैं कि 80 के दशक के महाकुंभ में शाही स्नान के दौरान सैकड़ों घोड़ों साथ उसमें कई हाथी भी शामिल थे। अचानक संगम से कुछ पहले उनमें से दो हाथी भड़क गए।

विज्ञापन
The elephant got angry at the royal bath, was tied in the Muslim colony of Jhunsi for two months
हाथी। - फोटो : संवाद।

विस्तार

गंगातट तट पर मुसलिम आबादी के बुजुर्गों के पास कुंभ -महाकुंभ को लेकर पुरानी बातें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। महाकुंभ में शाही स्नान के दौरान हाथी के भड़कने का भी एक रोचक किस्सा इन दिनों लोगों की जुबान पर है। इस रोचक घटनाक्रम के प्रमाण के रूप में बस्ती के बीच खड़ा दशकों पुराना नीम का पेड़ अब बी गवाही दे रहा है। इसे देखते हुए अब भीड़ वाले आयोजनों में हाथी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

विज्ञापन

झूंसी कोहना की मुसलिम बस्ती के 70 वर्षीय रईस अहमद और 65 वर्षीय नौशाद अहमद बताते हैं कि 80 के दशक के महाकुंभ में शाही स्नान के दौरान सैकड़ों घोड़ों साथ उसमें कई हाथी भी शामिल थे। अचानक संगम से कुछ पहले उनमें से दो हाथी भड़क गए। एक हाथी ने तो मौके पर ही एक महिला श्रद्धालु को मार डाला था। पूरे मेला क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई थी। लोग जान बचाने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में इधर-उधर भागने लगे थे।

विज्ञापन

दो महीने तक बंधा रहा हाथी

बस्ती के 75 वर्षीय मुश्ताक और 62 वर्षीय कामरान खान बताते हैं कि मेले में भड़के एक हाथी को परेड की ओर से भगाकर झूंसी लगाया गया था। तब उसे हमारे गांव की मुसलिम बस्ती के विशालकाय नीम के पेड़ में बांधा गया था। बिगड़ा हाथी तकरीबन दो महीने तक उसी पेड़ में बंधा रहा। तब बस्ती के मुसलिमों ने हाथी की खुराकी के साथ ही महावत और अन्य लोगों के खाने का इंतजाम दो महीने तक किया था। मेला संपन्न होने पर महावत उसे लेकर गए थे।

दशकों बाद आज भी नीम का वह विशालकाय पेड़ मुसलिम बस्ती में शान के साथ खड़ा है। उल्लेखनीय है कि शाही स्नान के दौरान हाथी के भड़कने की घटना का प्रशासन कड़ा संज्ञान लिया था। यही वजह है कि अब सार्वजनिक समारोहों और भीड़ वाले आयोजनों में हाथी की सवारी प्रतिबंधित कर दी गई है। यही वजह है कि पथरचट्टी और अन्य ऐतिहासिक रामदल की शोभायात्राओं में अब आर्टिफिशियल हाथी का इस्तेमाल किया जाने लगा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed