जमानत आदेशों में आपराधिक इतिहास का भी जिक्र करें अदालतें

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 19 Dec 2020 10:35 PM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की सभी अधीनस्थ जिला अदालतों को निर्देश दिया है कि किसी भी अभियुक्त के जमानत प्रार्थनापत्र पर आदेश देते समय अपने आदेश में उसके आपराधिक इतिहास का पूरा ब्यौरा अवश्य दर्ज करें। यदि कोई आपराधिक इतिहास न हो तो इसका भी जिक्र किया जाए। 
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फिरोजाबाद के उदय प्रताप उर्फ दाऊ की जमानत अर्जी खारिज करते हुए न्यायमूर्ति समित गोपाल ने कहा कि हालांकि आपराधिक इतिहास जमानत अर्जी पर निर्णय करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता है मगर आपराधिक इतिहास होने अपराधी को किसी गैरजमानती अपराध में जमानत पर रिहा करने या नहीं रिहा करने का आधार बनता है। कोर्ट ने महानिबंधक हाईकोर्ट इस आदेश की प्रति समस्त जिला अदालतों को प्रेषित करने का निर्देश दिया है। 29 जनवरी तक इसकीअनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। 


याची उदय प्रताप ने अपनी जमानत अर्जी में कहा था कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उसके खिलाफ सिर्फ एक ही मुकदमा है। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील द्वारा दी गई जानकारी से पता चला कि याची का आपराधिक इतिहास है। जिसका जिक्र अधीनस्थ न्यायालय ने उसकी जमानत अर्जी खारिज करते समय अपने आदेश में नहीं किया है।

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