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हाईकोर्ट ने रोका सहकारिता संघ के एमडी का वेतन

Sat, 02 Jul 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 02 Jul 2016 01:26 AM IST
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The court stopped the salaries of the cooperative association , MD
अदालत - फोटो : file
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहकारिता संघ के प्रबंध निदेशक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अरविंद सिंह का वेतन रोक दिया है। उनकी नियुक्ति से संबंधित से संबंधित मूल दस्तावेज तलब कर लिए हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव नियुक्ति की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में छेड़छाड़ पर नाराजगी जताते हुए अगली तारीख पर उनको व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अरविंद सिंह की नियुक्ति को डॉ. महेश सिंह ने याचिका दाखिल कर चुनौती दी है। याचिका पर जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया कि कोऑपरेटिव फे डरेशन एक्ट की धारा 3(ए) में प्रावधान है कि फेडरेशन का प्रबंध निदेशक प्रथम श्रेणी का अधिकारी होगा। उसे राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा। जबकि अरविंद सिंह रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं और नियमानुसार उनकी नियुक्ति नहीं की जा सकती है। राज्यपाल ने 16 मई 2016 को विशेष कार्याधिकारी का पद सृजित किया, साथ ही यह भी कह दिया कि अरविंद सिंह छह माह के लिए फेडरेशन के कार्यकारी प्रबंध निदेशक रहेंगे। जबकि आयुक्त एवं निबंधक सहकारी समिति ने 16 अगस्त 2015 के अपने आदेश में कहा है कि किसी भी सेवानिवृत्त अधिकारी या कर्मचारी से 60 वर्ष की आयु के बाद काम न लिया जाए।
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कोर्ट ने अरविंद सिंह की नियुक्ति प्रक्रिया को अपूर्ण मानते हुए कहा कि राज्यपाल जब भी किसी पद का सृजन करें तो उनके समक्ष पद पर बैठने वाले की शैक्षिक योग्यता, चयन के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और वेतनमान सरकार द्वारा रखा जाए। इसके बाद ही किसी पद का सृजन किया जाए। चूंकि मौजूदा मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है इसलिए चयन प्रक्रिया अपूर्ण है।
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प्रदेश के प्रमुख सचिव नियुक्ति की ओर से इस मामले में जानकारी से संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष रखे गए। कोर्ट ने पाया कि दस्तावेज में कई जगह ओवर राइटिंग की गई है और उस पर प्रमुख सचिव नियुक्ति के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने कहा कि अगली सुनवाई पर अरविंद सिंह की नियुक्ति से संबंधित सभी मूल दस्तावेज प्रमुख सचिव अपने व्यक्तिगत हलफनामे के साथ दाखिल करें। याचिका पर 12 जुलाई को अगली सुनवाई होगी। 
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