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गवर्नर को नहीं हटा सकता हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 12 Jan 2015 11:48 PM IST
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किसी राज्यपाल को हटाने या उसे पद से बर्खास्त करने का आदेश हाईकोर्ट नहीं दे सकता है। राज्यपाल की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 156 (1) के तहत की जाती है और उनको राष्ट्रपति की इच्छा तक पद पर बने रहने का अधिकार है। हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल को हटाने का आदेश नहीं दे सकता है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक को पद से हटाने के लिए दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने उपरोक्त निरीक्षण के साथ खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की दो सदस्यीय पीठ ने सिटीजन्स फॉर डेमोक्रेसी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्यपाल अपने पद पर रहे अथवा नहीं यह तय करने करने का अधिकार हाईकोर्ट के पास नहीं है। पीठ ने फैसले में राज्यपाल की शक्तियों और अधिकारों का विस्तार से उल्लेख भी किया है।
जनहित याचिका में राज्यपाल रामनाईक को बर्खास्त करने का आदेश देने की मांग की गई थी। कहा गया कि राज्यपाल ने 11 दिसंबर 2014 को फैजाबाद में राम मंदिर निर्माण के संबंध में बयान दिया है। उन्होंने इच्छा जाहिर की कि राम मंदिर का निर्माण शीघ्र हो जाना चाहिए। देश की जनता की इच्छा है कि राम मंदिर का निर्माण हो। राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति ऐसा बयान नहीं दे सकता है। राम मंदिर का मसला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। राज्यपाल ने एक धर्म विशेष के पक्ष में बयान देकर संवैधानिक पद की मर्यादा के विपरीत कार्य किया है। प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कहा कि हाईकोर्ट रूल्स के मुताबिक याचिका पोषणीय नहीं है। याची का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरन जैन ने रखा।
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जनहित याचिका में राज्यपाल रामनाईक को बर्खास्त करने का आदेश देने की मांग की गई थी। कहा गया कि राज्यपाल ने 11 दिसंबर 2014 को फैजाबाद में राम मंदिर निर्माण के संबंध में बयान दिया है। उन्होंने इच्छा जाहिर की कि राम मंदिर का निर्माण शीघ्र हो जाना चाहिए। देश की जनता की इच्छा है कि राम मंदिर का निर्माण हो। राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति ऐसा बयान नहीं दे सकता है। राम मंदिर का मसला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। राज्यपाल ने एक धर्म विशेष के पक्ष में बयान देकर संवैधानिक पद की मर्यादा के विपरीत कार्य किया है। प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कहा कि हाईकोर्ट रूल्स के मुताबिक याचिका पोषणीय नहीं है। याची का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरन जैन ने रखा।
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