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विधायक विजय मिश्र के भवन के ध्वस्तीकरण का मामला : पीडीए के इतिहास में अध्यक्ष के आदेश के खिलाफ अपील का पहला है मामला
Tue, 03 Nov 2020 12:28 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 03 Nov 2020 12:28 AM IST
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विधायक विजय मिश्र।
- फोटो : अमर उजाला
आगरा जेल में बंद विधायक विजय मिश्रा के अल्लापुर स्थित पांच मंजिला कॉम्प्लेक्स ध्वस्तीकरण मामले में प्रयागराज विकास प्राधिकरण का हाईकोर्ट में अपील करना चौंकाने वाला है। पीडीए के इतिहास में अध्यक्ष (कमिश्नर) के आदेश के खिलाफ कोर्ट जाने का यह पहला मामला है। कमिश्नर के आदेश पर सोमवार को विजय मिश्रा के पक्षकार को जोनल अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर प्रत्यावेदन देना था। जिसका निस्तारण छह नवंबर तक किए जाने का निर्देश था। पीडीए अफसर कमिश्नर के आदेश का अनुपालन कर मामले में फिर से सुनवाई करने के बजाय हाईकोर्ट की शरण में चले गए।
पीडीए के अध्यक्ष के तौर पर कमिश्नर की हर मामले में दखल होती है। उन्हीं की अध्यक्षता में हर तीन महीने में होने वाली बोर्ड की बैठक में नीतिगत मामलों में निर्णय लिए जाते हैं। विधायक विजय मिश्रा के कॉम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण की अपील पर हाईकोर्ट के निर्देश पर कमिश्नर ने 28 अक्तूबर को सुनवाई की थी। पीडीए के अफसर कॉम्प्लेक्स निर्माण को अवैध बता रहे हैं जबकि याची इस बारे में नोटिस मिलने से इनकार कर चुका है।
पीडीए और याची की दलीलों को सुनने के बाद कमिश्नर कोर्ट ने याची को अपने आदेश से राहत दी थी। जिसमें विजय मिश्रा की ओर से सोमवार को पीडीए के जोनल अफसर के समक्ष अपील कर अपनी बात रखने का अंतिम मौका दिया गया था। इस हाईप्रोफाइल मामले में कमिश्नर कोर्ट के आदेश से पीडीए अफसर बैकफुट पर आ गए। उस दिन कॉम्प्लेक्स ध्वस्तीकरण की तैयारियां धरी की धरी रह गईं।
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सोमवार को पीडीए की ओर से अप्रत्याशित फैसला लिया गया। विजय मिश्रा की ओर से याची उनकी सास इंद्रकली और उनके अधिवक्ता अपना पक्ष रखते इससे पहले पीडीए ने हाईकोर्ट में इस मामले के खिलाफ अपील दाखिल कर दी। फिलहाल पूरे मामले में पीडीए अफसर चुप्पी साधे हैं। माना जा रहा है कि अध्यक्ष की कोर्ट के आदेश के खिलाफ यूं ही कोर्ट जाने का निर्णय नहीं लिया गया। लखनऊ तक गूंजे इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद ही इस पर सहमति बनी होगी।
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पीडीए के अध्यक्ष के तौर पर कमिश्नर की हर मामले में दखल होती है। उन्हीं की अध्यक्षता में हर तीन महीने में होने वाली बोर्ड की बैठक में नीतिगत मामलों में निर्णय लिए जाते हैं। विधायक विजय मिश्रा के कॉम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण की अपील पर हाईकोर्ट के निर्देश पर कमिश्नर ने 28 अक्तूबर को सुनवाई की थी। पीडीए के अफसर कॉम्प्लेक्स निर्माण को अवैध बता रहे हैं जबकि याची इस बारे में नोटिस मिलने से इनकार कर चुका है।
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पीडीए और याची की दलीलों को सुनने के बाद कमिश्नर कोर्ट ने याची को अपने आदेश से राहत दी थी। जिसमें विजय मिश्रा की ओर से सोमवार को पीडीए के जोनल अफसर के समक्ष अपील कर अपनी बात रखने का अंतिम मौका दिया गया था। इस हाईप्रोफाइल मामले में कमिश्नर कोर्ट के आदेश से पीडीए अफसर बैकफुट पर आ गए। उस दिन कॉम्प्लेक्स ध्वस्तीकरण की तैयारियां धरी की धरी रह गईं।
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सोमवार को पीडीए की ओर से अप्रत्याशित फैसला लिया गया। विजय मिश्रा की ओर से याची उनकी सास इंद्रकली और उनके अधिवक्ता अपना पक्ष रखते इससे पहले पीडीए ने हाईकोर्ट में इस मामले के खिलाफ अपील दाखिल कर दी। फिलहाल पूरे मामले में पीडीए अफसर चुप्पी साधे हैं। माना जा रहा है कि अध्यक्ष की कोर्ट के आदेश के खिलाफ यूं ही कोर्ट जाने का निर्णय नहीं लिया गया। लखनऊ तक गूंजे इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद ही इस पर सहमति बनी होगी।