प्रयागराज : नवाबगंज में पंपिंग सेट पर किसान की नृशंस हत्या, हत्यारों का नहीं लगा सुराग
डॉग स्क्वायड और फील्ड यूनिट भी मौके पर पहुंची लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। घर वालों ने भूमि विवाद में हत्या का शक जताते हुए छह पट्टीदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने चार को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ कर रही है।
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इब्राहिमपुर मोहल्ले में मंगलवार की रात किसान राज बहादुर पटेल की नृशंस हत्या कर दी गई। उसका सिर और चेहरा ईट-पत्थरों से कुचल दिया गया था। बुधवार सुबह पत्नी नाश्ता लेकर पहुंची तो राज बहादुर का शव देखकर दहल गई।
सूचना मिलते ही एसपी गंगापार फोर्स लेकर पहुंच गए। डॉग स्क्वायड और फील्ड यूनिट भी मौके पर पहुंची लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। घर वालों ने भूमि विवाद में हत्या का शक जताते हुए छह पट्टीदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने चार को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ कर रही है।
नवाबगंज थाना क्षेत्र के इलाके के इब्राहिमपुर निवासी राज बहादुर पटेल 38 पुत्र छोटे लाल, खेती किसानी करता था। मंगलवार की शाम वह घर से थोड़ी दूर स्थित पंपिंग सेट पर फसलों की रखवाली के लिए निकला था। रात में राज बहादुर का सिर और चेहरा पत्थरों से कुचलकर मार डाला गया। सुबह पत्नी राजकुमारी नाश्ता लेकर पहुंची तो रक्तरंजित शव देख दहाड़े मारनी लगी।
पट्टीदारों से चल रहा था विवाद
हल्ला मचा तो ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी हो गई। सूचना पर एसपी गंगापार अभिषेक अग्रवाल, डाग स्क्वायड और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट के साथ पहुंचे। घर वालों ने बताया कि राज बहादुर की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी लेकिन पट्टीदारों से भूमि को लेकर विवाद चल रहा था। उन्हेें पूरा शक है कि पटटीदारों ने ही जमीन हड़पने के लिए राज बहादुर की हत्या कर दी।
बाद में परिजनों की तहरीर पर छह पट्टीदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। इंस्पेक्टर नवाबगंज ने बताया कि इस मामले में चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अब तक की जांच में भी पता चल रहा है कि राज बहादुर की और किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।
परिवार वालों का रो रोकर बुरा हाल
राज बहादुर पटेल की हत्या के बाद मां राम कली, बेटियां कविता, अनीता और अंजली का रो रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हो गए थे।
भाई की संदिग्ध हालात में हो चुकी है मौत
राज बहादुर के भाई लल्ला की करीब दो साल पहले संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। परिजनों ने बताया कि जमीनी विवाद के मुकदमों की पैरवी के चलते उसे मौत के घाट उतार दिया गया था। हालांकि लल्ला के शव का पीएम नहीं कराने से मौत की गुत्थी अनसुुलझी ही रह गई थी।