गवाह को फर्जी ढंग से जेल भेजने का मामला : दुष्कर्म पीड़िता के भाई पर भी दर्ज कराया था फर्जी केस
गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जांच में मामला झूठा मिलने पर पुलिस ने लगा दी थी फाइनल रिपोर्ट। इस घटना से पुलिस की कार्रवाई पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है।
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दुष्कर्म केस के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के आरोपी पुलिसकर्मियों ने एक और खेल किया था। उन्होंने गवाह को तो जेल भेजा ही था, दुष्कर्म पीड़िता के भाई को भी फर्जी मुकदमे में फंसाया था। उसके खिलाफ फूलपुर थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। हालांकि विवेचना के दौरान मामला झूठा पाया गया था। मामले में चल रही जांच में अब इस बिंदु को भी शामिल कर लिया गया है।
मामले का खुलासा दो दिन पहले होने के बाद हड़कंप मच गया था। जिसमें अगले दिन सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव, इंस्पेक्टर हंडिया बृजेश सिंंह और नारकोटिक्स प्रभारी महाबीर सिंह को उनके वर्तमान तैनाती स्थल से हटा दिया गया था। साथ ही उन्हें जोनल दंगा नियंत्रण इकाई से अटैच कर दिया गया। बुधवार को इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यह बात सामने आई है कि आरोपी पुलिसकर्मियों ने दुष्कर्म पीड़िता पर दबाव बनाने के लिए सिर्फ गवाह को ही जेल नहीं भेजा। बल्कि उसके भाई को भी फर्जी मुकदमे में फंसवा दिया।
यह मुकदमा इसी साल फूलपुर थाने में लिखा गया था। इसमें पीड़िता के भाई के साथ ही उस गवाह को भी नामजद कराया गया था जिसे बाद में हंडिया में दर्ज दुष्कर्म के मुकदमे में फर्जी तरीके से जेल भेजा गया। हालांकि इस मामले में उनका खेल मुकदमा दर्ज कराने तक ही सीमित रहा। विवेचना के दौरान मामला झूठा मिलने पर फूलपुर पुलिस ने इसमें अंतिम रिपोर्ट लगा दी। इससे साफ है कि न सिर्फ दुष्कर्म पीड़िता के गवाह बल्कि उसके परिजनों को भी फंसाने की कोशिश की गई। इस पूरी कवायद का नतीजा उसे दबाव में लेकर मुकदमे में सुलह के लिए मजबूर करना था।
थाने का सीसीटीवी फुटेज अहम साक्ष्य
सूत्रों का कहना है कि इस खेल में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कर्नलगंज थाने का सीसीटीवी फुटेज अहम साक्ष्य साबित हो सकता है। दरअसल यह बात भी सामने आई है कि जिस स्कूटी के साथ गवाह को पकड़ा गया, उस स्कूटी को पहले कर्नलगंज थाने ले जाया गया और इसके बाद उसे हंडिया थाने भेजकर दाखिल कराया गया। साथ ही बीच रास्ते ही ओरिजिनल नंबर प्लेट बदलकर उस पर ट्रक की नंबर प्लेट लगा दी गई। सूत्रों का कहना है कि कर्नलगंज थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे में स्कूटी की तस्वीरें कैद है। ऐसे में यहां का फुटेज इस खेल केखुलासे में अहम साक्ष्य साबित हो सकता है।
फर्जी गिरफ्तारी में शामिल अन्य भी रडार पर
दुष्कर्म के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मी भी जांच अफसर के रडार पर हैं। दरअसल खेल में शामिल इंस्पेक्टरों व दरोगा के कहने पर एसओजी टीम के चार सिपाहियों ने गवाह को फर्जी तरीकेसे पकड़कर हंडिया थाने पहुंचा था। जहां से उसे जेल भेजा गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि इनमें भी तीन सिपाही उसी जाति के हैं जो दोनों इंस्पेक्टर और दुष्कर्म के आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर की है।