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टीजीटी संस्कृत के सात सवालों के जवाब गलत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 15 Jun 2016 02:56 AM IST
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माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा टीजीटी संस्कृत के 442 पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में सात प्रश्नों के उत्तर गलत दिए जाने का आरोप है। आंसर-की से मिलाने के बाद इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका दाखिल कर कहा गया कि तीन बार आंसर-की जारी करने के बाद इन सात प्रश्नों के उत्तर गलत ही रहे। इसकी वजह से याची चयन से बाहर हो गया और गलत उत्तर देने वाले लोग चयनित हो गए। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने चयन बोर्ड को इस मामले पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
याची नेमचंद्र के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि टीजीटी संस्कृत के 442 पदों के लिए लिखित परीक्षा 14 जनवरी 2014 को आयोजित की गई। 29 मार्च 2016 को लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया। इसके बाद जारी आंसर-की से याची ने अपनी उत्तर पुस्तिका का मिलान किया तो पता चला कि आंसर-की में दिए गए सात प्रश्नों के उत्तर गलत थे। अधिवक्ता का कहना था कि याची ने इस प्रश्नों के सही उत्तर दिए जबकि गलत उत्तर देने वालों का चयन कर लिया गया। रंजीत सिंह केस में हाईकोर्ट का निर्देश है कि जब प्रश्न का उत्तर गलत होने का संदेह हो तो उसका समाधान विशेषज्ञ की राय से होना चाहिए।
इस मामले में चयन बोर्ड ने तीन बार आंसर-की जारी की मगर हर बार सात प्रश्नों के उत्तर गलत ही थे। याचिका में मांग की गई कि उत्तरों की जांच विशेषज्ञ से कराई जाए। याची ने पाठ्य पुस्तक भी कोर्ट में प्रस्तुत कर बताया कि उसने जो उत्तर दिए हैं वह पाठ्य पुस्तक के अनुसार सही हैं, जबकि आंसर-की में गलत हैं। इस स्थिति में पाठ्य पुस्तक का उत्तर ही सही माना जाना चाहिए। कोर्ट ने चयन बोर्ड को इस मामले में विशेषज्ञ की राय लेकर छह जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
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याची नेमचंद्र के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि टीजीटी संस्कृत के 442 पदों के लिए लिखित परीक्षा 14 जनवरी 2014 को आयोजित की गई। 29 मार्च 2016 को लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया। इसके बाद जारी आंसर-की से याची ने अपनी उत्तर पुस्तिका का मिलान किया तो पता चला कि आंसर-की में दिए गए सात प्रश्नों के उत्तर गलत थे। अधिवक्ता का कहना था कि याची ने इस प्रश्नों के सही उत्तर दिए जबकि गलत उत्तर देने वालों का चयन कर लिया गया। रंजीत सिंह केस में हाईकोर्ट का निर्देश है कि जब प्रश्न का उत्तर गलत होने का संदेह हो तो उसका समाधान विशेषज्ञ की राय से होना चाहिए।
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इस मामले में चयन बोर्ड ने तीन बार आंसर-की जारी की मगर हर बार सात प्रश्नों के उत्तर गलत ही थे। याचिका में मांग की गई कि उत्तरों की जांच विशेषज्ञ से कराई जाए। याची ने पाठ्य पुस्तक भी कोर्ट में प्रस्तुत कर बताया कि उसने जो उत्तर दिए हैं वह पाठ्य पुस्तक के अनुसार सही हैं, जबकि आंसर-की में गलत हैं। इस स्थिति में पाठ्य पुस्तक का उत्तर ही सही माना जाना चाहिए। कोर्ट ने चयन बोर्ड को इस मामले में विशेषज्ञ की राय लेकर छह जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
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