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जांच के दायरे में आएंगे दस हजार पद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 27 Jul 2017 02:18 AM IST
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यूपीएसएसएससी
- फोटो : amar ujala
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लोक सेवा आयोग में हुई भर्तियों की सीबीआई जांच की सिफारिश होने के बाद इसके दायरे में तकरीबन 10 हजार पदों के आने की आशंका है। विभिन्न पदों के लिए यह परीक्षाएं दो चरणों में हुईं थीं। आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.अनिल यादव के कार्यकाल में गड़बड़ियों को लेकर मोर्चा खोलने वाले प्रतियोगी छात्रों ने जांच के दायरे में आने वाले पदों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। उनके मुताबिक राजस्व निरीक्षक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी तथा अधीनस्थ कृषि सेवा वर्ग तीन के 7675 पदों सहित सम्मिलित अवर अभियंता विशेष चयन, 2008, सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा 2008, अवर अभियंता सामान्य चयन 2008, प्रोग्रामर श्रेणी समेत अन्य भर्तियां भी जांच के दायरे में आएंगी।
प्रतियोगी छात्रों के मुताबिक विशेष वर्ग को लाभ पहुंचने के लिए पूर्व अध्यक्ष ने जमकर मनमानी की। अधीनस्थ कृषि सहायक वर्ग तीन के कुल 6628 पदों में ओबीसी के लिए शासन से 566 पद निर्धारित थे लेकिन आयोग ने सामान्य एवं अनुसूचित जाति के अधियाचित पदों में कटौती करके ओबीसी की सीट 2030 कर दी। उच्च न्यायालय द्वारा इस पूरे परिणाम को रद्द किया जा चुका है। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। इसी प्रकार खाद्य सुरक्षा अधिकारी 2014 के 430 पदों की परीक्षा पूर्व अध्यक्ष ने बहुत जल्दी कराई। इसमें अहर्ता तथा आरक्षण नियमावली में छेड़छाड़ को लेकर मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। इस परीक्षा परिणाम दो बार जारी हुआ है। राजस्व निरीक्षक 2014 सबसे विवादित परीक्षा रही। इसके 617 पदों पर चयन सभी नियम कानून को दरकिनार कर किया गया। इसकी स्क्रीनिंग परीक्षा की उत्तर कुंजी तक जारी नहीं की गई। इतना बड़ा परिणाम बिना अभ्यर्थियों के नाम केवल अनुक्रमांक के आधार पर जारी कर दिया गया। यह तीनों मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।
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प्रतियोगी छात्रों के मुताबिक विशेष वर्ग को लाभ पहुंचने के लिए पूर्व अध्यक्ष ने जमकर मनमानी की। अधीनस्थ कृषि सहायक वर्ग तीन के कुल 6628 पदों में ओबीसी के लिए शासन से 566 पद निर्धारित थे लेकिन आयोग ने सामान्य एवं अनुसूचित जाति के अधियाचित पदों में कटौती करके ओबीसी की सीट 2030 कर दी। उच्च न्यायालय द्वारा इस पूरे परिणाम को रद्द किया जा चुका है। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। इसी प्रकार खाद्य सुरक्षा अधिकारी 2014 के 430 पदों की परीक्षा पूर्व अध्यक्ष ने बहुत जल्दी कराई। इसमें अहर्ता तथा आरक्षण नियमावली में छेड़छाड़ को लेकर मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। इस परीक्षा परिणाम दो बार जारी हुआ है। राजस्व निरीक्षक 2014 सबसे विवादित परीक्षा रही। इसके 617 पदों पर चयन सभी नियम कानून को दरकिनार कर किया गया। इसकी स्क्रीनिंग परीक्षा की उत्तर कुंजी तक जारी नहीं की गई। इतना बड़ा परिणाम बिना अभ्यर्थियों के नाम केवल अनुक्रमांक के आधार पर जारी कर दिया गया। यह तीनों मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।
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