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पुलिस भर्ती बोर्ड पर दस हजार रुपये हर्जाना
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पुलिस भर्ती बोर्ड पर लगा दस हजार का हर्जाना
प्रयागराज। पुलिस भर्ती बोर्ड के मनमाने फैसलों से नाराज हाईकोर्ट ने बोर्ड पर दस हजार रुपये का हर्जाना लगाया है और छह सप्ताह में याची की ओबीसी श्रेणी में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति पर विचार कर निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा भर्ती बोर्ड ने नियुक्ति के लिए योग्य अभ्यर्थी को बार-बार कोर्ट आने के लिए मजबूर किया और बिना विवेक का इस्तेमाल किए उसका दावा निरस्त कर दिया गया ताकि विभागीय अधिकारी कोर्ट की अवमानना से बच सकें। कोर्ट ने कहा है कि हर्जाना राशि मनमाना आदेश देने के लिए जिम्मेदार अधिकारी के वेतन से वसूल की जाए।
आदित्य यादव की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया है। याची के अधिवक्ता सुनील यादव का कहना था कि सिपाही भर्ती 2015 में याची को अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक मिले थे, उसने अपना ओबीसी प्रमाणपत्र भी निर्धारित समय में दे दिया था। इसके बावजूद उसे चयन से बाहर कर दिया गया। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने पर कोर्ट ने भर्ती बोर्ड को निर्णय लेने का आदेश दिया। इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो याची ने अवमानना याचिका की।
इस पर अपर सचिव पुलिस भर्ती बोर्ड ने याची के दावे पर बिना विचार किए उसका प्रत्यावेदन खारिज कर दिया। याची ने फिर से हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने भर्ती बोर्ड की मनमानी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सफल होने के बाद भी नियुक्ति न देकर अभ्यर्थी को बार बार कोर्ट में दौड़ाना गलत है। कोर्ट ने भर्ती बोर्ड के तीन मई 2019 के आदेश को रद्द कर दिया है। बोर्ड पर दस हजार रुपये का हर्जाना लगाते हुए कोर्ट ने नियुक्ति पर पुनर्विचार का आदेश दिया है।
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प्रयागराज। पुलिस भर्ती बोर्ड के मनमाने फैसलों से नाराज हाईकोर्ट ने बोर्ड पर दस हजार रुपये का हर्जाना लगाया है और छह सप्ताह में याची की ओबीसी श्रेणी में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति पर विचार कर निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा भर्ती बोर्ड ने नियुक्ति के लिए योग्य अभ्यर्थी को बार-बार कोर्ट आने के लिए मजबूर किया और बिना विवेक का इस्तेमाल किए उसका दावा निरस्त कर दिया गया ताकि विभागीय अधिकारी कोर्ट की अवमानना से बच सकें। कोर्ट ने कहा है कि हर्जाना राशि मनमाना आदेश देने के लिए जिम्मेदार अधिकारी के वेतन से वसूल की जाए।
आदित्य यादव की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया है। याची के अधिवक्ता सुनील यादव का कहना था कि सिपाही भर्ती 2015 में याची को अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक मिले थे, उसने अपना ओबीसी प्रमाणपत्र भी निर्धारित समय में दे दिया था। इसके बावजूद उसे चयन से बाहर कर दिया गया। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने पर कोर्ट ने भर्ती बोर्ड को निर्णय लेने का आदेश दिया। इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो याची ने अवमानना याचिका की।
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इस पर अपर सचिव पुलिस भर्ती बोर्ड ने याची के दावे पर बिना विचार किए उसका प्रत्यावेदन खारिज कर दिया। याची ने फिर से हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने भर्ती बोर्ड की मनमानी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सफल होने के बाद भी नियुक्ति न देकर अभ्यर्थी को बार बार कोर्ट में दौड़ाना गलत है। कोर्ट ने भर्ती बोर्ड के तीन मई 2019 के आदेश को रद्द कर दिया है। बोर्ड पर दस हजार रुपये का हर्जाना लगाते हुए कोर्ट ने नियुक्ति पर पुनर्विचार का आदेश दिया है।
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