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Prayagraj News: इविवि में विकसित टेक्नोलॉजी का होगा व्यावसायिक इस्तेमाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2024 05:47 AM IST
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Technology developed at IVV will be used commercially
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में विकसित टेक्नोलॉजी का अब व्यावसायिक इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। इसके लिए विवि ने बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) के साथ समझौता किया है।
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इस मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) का उद्देश्य विश्वविद्यालय में विकसित प्रौद्योगिकियों और बौद्धिक संपत्तियों का उद्योग एवं अन्य क्षेत्रों में भागीदारों के साथ व्यावसायिक इस्तेमाल करना है। इसके तहत राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम अब विश्वविद्यालय में विकसित प्रौद्योगिकियों (टेक्नोलॉजी) और बौद्धिक संपत्तियों का व्यावसायिक क्षमता के संदर्भ में मूल्यांकन कर उनके व्यावसायिक प्रयोग से संबंधित सेवाएं प्रदान करेगा।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला और एनआरडीसी की ओर से सीएमडी कमोडोर अमित रस्तोगी ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मई 2024 से 10 वर्षों की अवधि के लिए वैध रहेगा। इविवि की पीआरओ प्रो.जया कपूर ने बताया कि यह उपलब्धि कुलपति प्रो.संगीता के प्रयासों से संभव हुई है। उनकी दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता इस समझौते को सफल बनाने में सहायक रही।
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इविवि के डीन शोध (अनुसंधान एवं विकास) प्रो.एसआई रिजवी ने विश्वविद्यालय में उद्योगों के लिए समस्या-समाधान मूलक शोध के अनुकूल वातावरण बनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग एवं अकादमिक संपर्क को बढ़ाने से शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शोध होगा। प्रतिभा के बावजूद शोधार्थियों को अपने उत्पादों को पेटेंट कराने एवं उनका व्यावसायीकरण करने में ठीक से मार्गदर्शन नहीं मिलता था, लेकिन अब यह दिक्कत नहीं होगी।

वहीं, इलाहाबाद विश्वविद्यालय पेटेंट समिति के अध्यक्ष डॉ विष्णु प्रभाकर श्रीवास्तव ने कहा कि सामाजिक लाभ के लिए विश्वविद्यालय ने नवाचारों के व्यावसायीकरण के प्रयास शुरू किए हैं। इस एमओए का उद्देश्य विश्वविद्यालय से निकलने वाली प्रौद्योगिकियों, जानकारियों, आविष्कारों और पेटेंटों को बढ़ावा देना, विकसित करना एवं उनका व्यावसायीकरण करना है।
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