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विवि के विधि संकाय के अध्यापकों से वसूली का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 Aug 2016 02:01 AM IST
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इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के विधि पाठ्यक्रमों की मान्यता लेने में लापरवाही बरतने वाले अध्यापकों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। जिम्मेदार पदों से वंचित किए जाने के अलावा उनसे वसूली का फरमान भी जारी हो गया है। समय से मान्यता नहीं लेने की वजह से बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विश्वविद्यालय और दो संघटक कालेजों पर छह-छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। रजिस्ट्रार ने वित्त अधिकारी को पत्र जारी करके विधि संकाय के जिम्मेदार अध्यापकों से इसकी वसूली के लिए कहा है।
विश्वविद्यालय के पांच वर्षीय बीएएलएलबी पाठ्यक्रम के लिए 2008 तथा एलएलबी तीन वर्षीय कोर्स के लिए 2010 से बार काउंसिल से मान्यता नहीं ली गई है। इसकी वजह से विश्वविद्यालय के अलावा सीएमपी और इलाहाबाद डिग्री कालेज के एलएलबी कोर्स की मान्यता पर भी सवाल खड़ा हो गया था। हालांकि, विश्वविद्यालय के आवेदन पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दोनों पाठ्यक्रमों के लिए एक साल के लिए अनुमति तो दे दी है, लेकिन साथ में छह-छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया है।
विश्वविद्यालय में इस राशि की भरपाई बीएएलएलबी के फंड से हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए विभागाध्यक्ष तथा प्रमुख पदों पर रहे संकाय के अध्यापकों को जिम्मेदार माना है और उनसे वसूली का निर्णय लिया है। यह वसूली उनके वेतन से की जाएगी। कुलपति के निर्देश पर इस बाबत रजिस्ट्रार की ओर से बृहस्पतिवार को वित्त अधिकारी को पत्र जारी कर दिया गया।
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विश्वविद्यालय के पांच वर्षीय बीएएलएलबी पाठ्यक्रम के लिए 2008 तथा एलएलबी तीन वर्षीय कोर्स के लिए 2010 से बार काउंसिल से मान्यता नहीं ली गई है। इसकी वजह से विश्वविद्यालय के अलावा सीएमपी और इलाहाबाद डिग्री कालेज के एलएलबी कोर्स की मान्यता पर भी सवाल खड़ा हो गया था। हालांकि, विश्वविद्यालय के आवेदन पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दोनों पाठ्यक्रमों के लिए एक साल के लिए अनुमति तो दे दी है, लेकिन साथ में छह-छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया है।
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विश्वविद्यालय में इस राशि की भरपाई बीएएलएलबी के फंड से हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए विभागाध्यक्ष तथा प्रमुख पदों पर रहे संकाय के अध्यापकों को जिम्मेदार माना है और उनसे वसूली का निर्णय लिया है। यह वसूली उनके वेतन से की जाएगी। कुलपति के निर्देश पर इस बाबत रजिस्ट्रार की ओर से बृहस्पतिवार को वित्त अधिकारी को पत्र जारी कर दिया गया।
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