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शिक्षक दिवसः कथक नृत्य गुरु पं बिरजू महाराज की याद में नृत्य प्रस्तुति
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Teacher's day
- फोटो : CITY DESK
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शिक्षक दिवस पर कथक नृत्य गुरु पं. बिरजू महाराज को शिष्य-शिष्याओं ने किया नमन
प्रयागराज। कथक नृत्य गुरु पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज व अन्य नृत्य गुरुओं को शिष्य-शिष्याओं ने बृहस्पतिवार की शाम गायन, वादन और नृत्य की प्रस्तुतियों से नमन किया। शिक्षक दिवस के मौके पर यह प्रस्तुति सरकुलर रोड स्थित कथक केंद्र में आयोजित थी।
इविवि की प्रो अनीता गोपेश ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सबसे पहले नृत्यमय गणपति स्तुति हुई। इसके बाद आरुष मिश्र ने एकल तबला वादन प्रस्तुत किया। तीन ताल पर उन्होंने परन, टुकड़े, तिहाइयां, तोड़ी, बाट और फर्द बजाकर तालियां बटोरीं। इनके बाद ढोलक पर संजना और तबले पर श्रेयांशी ने जुगबंदी पेश की। फिर शांभवी, प्रांजनि और प्रगति ने कजरी गायन पेश किया। विभा और माया ने पारंपरिक बंदिशों पर कथक नृत्य की थिरकन से खूब वाहवाही लूटी। इनके बाद ठुमरी के बोल पर भावनृत्य पेश किया अंकिता मौर्या ने। इसके बाद नृत्यांगन संस्था की कलाकारों की ओर से -क्यों आगे पीछे डोलते हो भंवरों की तरह... के बोल पर भावनृत्य प्रस्तुत किया। इसका निर्देशन किया नीतू त्रिपाठी ने। इसके बाद घर मोरे परदेसिया... के बोल पर दो समूह नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। हर्षिता, रीता कुशवाहा और राहुल ने भजन पेश किया। कान्हा के रास पर भाव नृत्य प्रस्तुत किया दीक्षा शुक्ला व अनन्या शुक्ला ने। संचालन निर्मला यमदाग्नि ने किया। केंद्र की निदेशक उर्मिला शर्मा ने अतिथियों और कलाकारों का आभार जताया।
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प्रयागराज। कथक नृत्य गुरु पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज व अन्य नृत्य गुरुओं को शिष्य-शिष्याओं ने बृहस्पतिवार की शाम गायन, वादन और नृत्य की प्रस्तुतियों से नमन किया। शिक्षक दिवस के मौके पर यह प्रस्तुति सरकुलर रोड स्थित कथक केंद्र में आयोजित थी।
इविवि की प्रो अनीता गोपेश ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सबसे पहले नृत्यमय गणपति स्तुति हुई। इसके बाद आरुष मिश्र ने एकल तबला वादन प्रस्तुत किया। तीन ताल पर उन्होंने परन, टुकड़े, तिहाइयां, तोड़ी, बाट और फर्द बजाकर तालियां बटोरीं। इनके बाद ढोलक पर संजना और तबले पर श्रेयांशी ने जुगबंदी पेश की। फिर शांभवी, प्रांजनि और प्रगति ने कजरी गायन पेश किया। विभा और माया ने पारंपरिक बंदिशों पर कथक नृत्य की थिरकन से खूब वाहवाही लूटी। इनके बाद ठुमरी के बोल पर भावनृत्य पेश किया अंकिता मौर्या ने। इसके बाद नृत्यांगन संस्था की कलाकारों की ओर से -क्यों आगे पीछे डोलते हो भंवरों की तरह... के बोल पर भावनृत्य प्रस्तुत किया। इसका निर्देशन किया नीतू त्रिपाठी ने। इसके बाद घर मोरे परदेसिया... के बोल पर दो समूह नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। हर्षिता, रीता कुशवाहा और राहुल ने भजन पेश किया। कान्हा के रास पर भाव नृत्य प्रस्तुत किया दीक्षा शुक्ला व अनन्या शुक्ला ने। संचालन निर्मला यमदाग्नि ने किया। केंद्र की निदेशक उर्मिला शर्मा ने अतिथियों और कलाकारों का आभार जताया।
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