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शैक्षणिक कार्य करने वाले अध्यापकों को ही सत्र लाभ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 12 Apr 2016 02:52 AM IST
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हाईकोर्ट ने कहा है कि सत्र लाभ का फायदा उन्हीं शिक्षकों को मिलेगा जो शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं अर्थात जो स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इससे इतर कार्यों में लगे अध्यापक जो किसी कार्यालय से संबद्ध हैं, शैक्षणिक लाभ पाने के हकदार नहीं है। कोर्ट का मानना है कि सत्र लाभ की व्यवस्था बच्चों के हित के ध्यान में रखकर बनाई गई ताकि उनकी पढ़ाई में बाधा न आए। प्रदेश सरकार की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति वीके बिड़ला की खंडपीठ ने एकल न्यायपीठ द्वारा गैर शैक्षणिक कार्य में नियुक्ति शिक्षिका को सत्र लाभ देने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने मामला एकलपीठ के समक्ष नए सिरे से विचार करने हेतु भेज दिया है।
स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने बताया कि कौशांबी के एक इंटर कालेज में नियुक्त सहायक अध्यापिका सरोज तिवारी को कुछ वर्ष पूर्व मनोविज्ञान शाला इलाहाबाद से संबद्ध कर दिया गया। जून 2015 में उनका रिटायरमेंट था। निदेशक मनोविज्ञान शाला ने एक वर्ष पूर्व ही उनको इस बात की सूचना दे दी थी। सरोज तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि चूंकि उनका रिटायरमेेंट सत्र के बीच है इसलिए उनको सत्र लाभ देते हुए मार्च 2016 में रिटायर किया जाए। एकल न्यायपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए सत्रलाभ देने का आदेश दिया। प्रदेश सरकार ने इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी थी। खंडपीठ ने कहा कि अध्यापिका मौजूदा समय में शैक्षणिक कार्य नहीं कर रही हैं। सुमित्रा धूलिया केस में फुल बेंच ने गैर शैक्षणिक कार्य करने वाले अध्यापकों को सत्र लाभ का हकदार नहीं माना है। इस आधार पर एकल न्यायपीठ का आदेश रद्द करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार का निर्देश दिया है।
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स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने बताया कि कौशांबी के एक इंटर कालेज में नियुक्त सहायक अध्यापिका सरोज तिवारी को कुछ वर्ष पूर्व मनोविज्ञान शाला इलाहाबाद से संबद्ध कर दिया गया। जून 2015 में उनका रिटायरमेंट था। निदेशक मनोविज्ञान शाला ने एक वर्ष पूर्व ही उनको इस बात की सूचना दे दी थी। सरोज तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि चूंकि उनका रिटायरमेेंट सत्र के बीच है इसलिए उनको सत्र लाभ देते हुए मार्च 2016 में रिटायर किया जाए। एकल न्यायपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए सत्रलाभ देने का आदेश दिया। प्रदेश सरकार ने इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी थी। खंडपीठ ने कहा कि अध्यापिका मौजूदा समय में शैक्षणिक कार्य नहीं कर रही हैं। सुमित्रा धूलिया केस में फुल बेंच ने गैर शैक्षणिक कार्य करने वाले अध्यापकों को सत्र लाभ का हकदार नहीं माना है। इस आधार पर एकल न्यायपीठ का आदेश रद्द करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार का निर्देश दिया है।
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