{"_id":"69fefa5aea419546cb0ae75f","slug":"taking-land-without-compensation-is-a-violation-of-constitutional-rights-2026-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : बिना मुआवजा जमीन लेना संवैधानिक अधिकारों का हनन, पीडीए की पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट की टिप्पणी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : बिना मुआवजा जमीन लेना संवैधानिक अधिकारों का हनन, पीडीए की पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट की टिप्पणी
Sat, 09 May 2026 02:41 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 09 May 2026 02:41 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि विकास प्राधिकरण की ओर से बिना मुआवजा दिए किसी नागरिक की निजी संपत्ति पर कब्जा करना या उसे अपने पास रखना पूरी तरह से अवैध है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि विकास प्राधिकरण की ओर से बिना मुआवजा दिए किसी नागरिक की निजी संपत्ति पर कब्जा करना या उसे अपने पास रखना पूरी तरह से अवैध है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
विज्ञापन
मंजू की जमीन ग्राम खानूपुर झूंसी, तहसील फूलपुर में है। पीडीए ने प्लॉट संख्या-54 का एक हिस्सा बिना किसी मुआवजे के अपने कब्जे में ले रखा है। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता 2003 से अपने अधिकारों के लिए भटक रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के पास कुल 798 वर्ग मीटर जमीन थी। इसमें से वह 680.40 वर्ग मीटर पहले ही बेच चुकी है। अब केवल 117.60 वर्ग मीटर जमीन ही अवशेष है। इस पर कब्जा दिलाने के लिए प्राधिकरण ने दो दशकों से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने इंदौर विकास प्राधिकरण बनाम मनोहर लाल और हरियाणा राज्य बनाम मुकेश कुमार जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति का अधिकार न केवल एक संवैधानिक अधिकार है बल्कि एक मानवाधिकार भी है। किसी भी परिस्थिति में राज्य को उचित कानूनी प्रक्रिया और मुआवजे के बिना निजी जमीन लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की कि प्रयागराज जिले में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां नागरिकों को उनके आवंटित मकानों या जमीनों का शांतिपूर्ण कब्जा नहीं मिल पा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीडीए के वकील ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि याचिकाकर्ता को अवशेष जमीन का शांतिपूर्ण कब्जा जल्द ही सौंप दिया जाएगा।
न्यायालय ने निर्देश दिया है कि यदि अवशेष 117.60 वर्ग मीटर जमीन उपलब्ध नहीं है तो प्राधिकरण याचिकाकर्ता को प्रचलित सर्किल रेट पर शुल्क लेकर उससे बड़े आकार की या कोई अन्य जमीन आवंटित करने के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने पीडीए को आदेश दिया है कि आगामी 12 मई 2026 तक इस संबंध में सभी प्रासंगिक तथ्य और अंतिम निर्णय पेश करे, ताकि मामले का निपटारा किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में याचिकाकर्ता की सहमति अनिवार्य होगी।