स्वाइन फ्लू : अब एमएलएन मेडिकल कॉलेज में भी होगी स्वाइन फ्लू की जांच, 24 घंटै के भीतर मिलेगी रिपोर्ट
अब इन्फ्लुएंजा ए (एचवन एनवन) यानि स्वाइन फ्लू की जांच के लिए सैंपल लखनऊ के एसजीपीजीआई नहीं भेजना पड़ेगा। पहली बार मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्वाइन फ्लू की जांच शुरू होने जा रही है।
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अब इन्फ्लुएंजा ए (एचवन एनवन) यानि स्वाइन फ्लू की जांच के लिए सैंपल लखनऊ के एसजीपीजीआई नहीं भेजना पड़ेगा। पहली बार मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्वाइन फ्लू की जांच शुरू होने जा रही है। जिसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 600 आरटी पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) किट की मांग की है।
ऐसे में पूरी संभावना है कि एक सितंबर से एमएलएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्वाइन फ्लू की जांच शुरू हो जाएगी। जांच शुरू होने के बाद मरीज की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध हो जाएगी। जिससे मरीज का उपचार समय रहते शुरू हो सकेगा। एमएलन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी लैब में आरटी पीसीआर मशीन उपलब्ध है। जिसकी वजह से मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आरटी पीसीआर किट की डिमांड की है।
अभी तक की व्यवस्था में सैंपल की रिपोर्ट एसजीपीजीआई से आने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है। जिससे उपचार सही दिशा में शुरू होने में समय लगता है। उधर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन), मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) व तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए वार्ड आरक्षित कर दिए गए हैं।
कोरोना संक्रमण के दौरान शुरू हुई थी आरटी पीसीआर की जांच
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में पहली बार आरटी पीसीआर की जांच कोरोना संक्रमण के दौरान शुरू हुई थी। वहीं इन्फ्लुएंजा ए (एचवन एनवन) की जांच भी आरटी पीसीआर किट से होती है। ऐसे में अब आरटी पीसीआर किट की डिमांड की गई है।
2013 व 2015 में आए थे स्वाइन फ्लू के मामले
जनपद में स्वाइन फ्लू के मामले 2013, 2015 के दौरान पहली बार सामने आए थे। जिसके बाद मरीजों का सैंपल जांच के लिए एसजीपीआई भेजा जाता था। इस दौरान 2013 में दो व 2015 में करीब तीन मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी।
स्वाइन फ्लू और मौसमी संक्रमण के लक्षण में अंतर
मौसमी संक्रमण
1-मौसमी संक्रमण के लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होते हैं।
2-इसमें मतली, उल्टी व दस्त बहुत ही कम व न के बराबर होते हैं।
3-हल्का बुखार और कम कमजोरी होती है, जो 3 से 5 दिन में ठीक हो जाती है।
4-यह सामान्य आराम और घरेलू उपायों से ठीक हो जाता है।
स्वाइन फ्लू
1-स्वाइन फ्लू के लक्षण बहुत अचानक और तेजी से प्रकट होते हैं।
2-इसमें सांस संबंधी लक्षणों के साथ-साथ उल्टी, दस्त व पेट दर्द की समस्या अधिक देखने को मिलती है, खासकर बच्चों में।
3-तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द व मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द व कमजोरी महसूस होती है।
3-यह फेफड़ों को अधिक प्रभावित करता है व गंभीर मामलों में निमोनिया व सांस लेने में भारी कठिनाई जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
पहली बार माइक्रोबायोलॉजी विभाग इन्फ्लुएंजा ए (एचवन एनवन) की जांच शुरू होने जा रही है। आरटी पीसीआर किट की डिमांड की गई है। संभवता एक सितंबर से जांच शुरू हो जाएगी। ऐसे में 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद मरीजों को उपचार समय रहते शुरू हो सकेगा। - डॉ. मोनिका सिंह, प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।