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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Swami Rajnarayanacharya Demands Probe into Waqf Board Properties Slams Remarks on Mahakumbh

Mahakumbh: 'देश में वक्फ बोर्ड के अधिकारों और संपत्तियों की जांच हो...', महाकुंभ पर टिप्पणी पर भी बोले स्वामी

Tue, 25 Feb 2025 10:37 AM IST
शाहरुख खान विनोद कुमार तिवारी, अमर उजाला, प्रयागराज
विनोद कुमार तिवारी, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 25 Feb 2025 10:37 AM IST
सार

Swami Raj Narayanacharya News: श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर देवस्थानम ट्रस्ट तिरुपति बालाजी मंदिर देवरिया के पीठाधीश्वर जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी राजनारायणाचार्य ने कहा कि देश में वक्फ बोर्ड के अधिकारों और संपत्तियों की जांच होनी चाहिए। सनातन बोर्ड वर्तमान समय की मांग है। जिस मांग को देशहित में पूर्ण करने के लिए प्रत्येक सनातनी हिंदुओं को संगठित होकर कार्य करना चाहिए।

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Swami Rajnarayanacharya Demands Probe into Waqf Board Properties Slams Remarks on Mahakumbh
Swami Rajnarayanacharya - फोटो : facebook

विस्तार

Waqf Board Property: भगवा वस्त्र मात्र नहीं है। यह त्याग व सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है। त्यागी, सदाचारी, सहनशील संन्यासी को ही इसे धारण करने का अधिकार होता है। बात अगर कर्तव्य की होती है तो इसके लिए वर्ण, जाति व आश्रम की कोई बाधा नहीं है। हमारा देश वैदिक संस्कृति के आधार पर चलने वाला है। 
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वक्फ बोर्ड की मनमानी अब बंद होनी चाहिए। सरकार को इसके अधिकार व संपत्तियों की जांच करनी चाहिए। महाकुंभ को लेकर अनर्गल टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कहना है श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर देवस्थानम ट्रस्ट तिरुपति बालाजी मंदिर देवरिया के पीठाधीश्वर जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी राजनारायणाचार्य का। विनोद कुमार तिवारी से विशेष बातचीत के प्रमुख अंश... 
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वक्फ बोर्ड भंग करने और सनातन बोर्ड गठित करने पर क्या कहेंगे? 

वक्फ बोर्ड भंग करने के संदर्भ में तो नहीं कह सकता, परंतु इनके अधिकारों और संपत्तियों की जांच होनी चाहिए। सनातन बोर्ड वर्तमान समय की मांग है। जिस मांग को देशहित में पूर्ण करने के लिए प्रत्येक सनातनी हिंदुओं को संगठित होकर कार्य करना चाहिए। किसी भी बोर्ड का गठन भारतीय संविधान के अनुसार ही होना चाहिए। 
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महाकुंभ में डुबकी लगाने के लिए पुरी दुनिया आतुर हैं। आप क्या कहेंगे ? 
जब मकर राशि पर सूर्य व चंद्रमा और वृषभ राशि पर बृहस्पति माघ मास की अमावस्या को आते हैं तो महाकुंभ का योग बनता है। गंगा-यमुना सरस्वती के संगम पर जल में अध्यात्म सुधा की धारा बह जाती है, बालू के कण चिन्मय हो जाते हैं। 12 कोस तक गंगा का जल दिव्य हो उठता है क्योंकि यह संगम क्षेत्र है। अपनी आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के लिए व मानव जीवन सफल करने के उद्देश्य से लोग महाकुंभ प्रयागराज आते है। इस समय कुंभके माध्यम से विश्व में सनातन की पताका लहरा रही हैं। 

महाकुंभ की व्यवस्था पिछले कुंभ की तुलना में आपको कैसी लगी? 
महाकुंभ में इससे अच्छी व्यवस्था कभी नहीं हुई। पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ बधाई के पात्र हैं। महाकुंभ में सनातन धर्म का हर रूप दिखता है। पृथ्वी पर अब तक के सबसे बड़े मानव समागम की अपार सफलता से सनातन विरोधियों के होश उड़ गए हैं। 
 

अखाड़ों और आपकी पीठ में अंतर क्या हैं, श्रेष्ठ कौन हैं? 
सनातन धर्म की रक्षा के लिए समर्पित साधु-संतों के संगठित स्वरूप को अखाड़ा कहते हैं। दशनामी संन्यासियों के अनेकों अखाड़े व मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर होते हैं। लोकहित में कार्यों को संपादित करते हुए श्रीवैष्णव भक्ति का प्रचार प्रसार करना श्रीवैष्णव पीठों का उद्देश्य होता है। सनातन धर्म का अविभाज्य अंग श्रीसंप्रदाय का पूर्वाचल भक्ति पीठ देवरिया में स्थापित है, जिसके पीठाधीश्वर आचार्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य कहे जाते हैं। 

धर्म संसद पर आपकी राय? 
धर्म संसद का मुख्य उद्देश्य है समाज को संगठित करते हुए वैदिक प्राच्य भारतीय संस्कृति की रक्षा करना। मैं इसके समर्थन में हूं। 
 

हिंदू राष्ट्र भारत को बनाएं जाने की मांग उठ रही हैं। आपकी राय क्या हैं? 
भारत तो अनादिकाल से ही हिंदू राष्ट्र है, अब उसे वर्तमान भारत के संविधान के माध्यम से स्थापित करने की आवश्यकता है। 
 

पहले हिंदू की बात होती थीं अब सिर्फ सनातन। इस परिवर्तन के पीछे वजह? 
सनातन का अर्थ है पुरातन, प्राचीन, अनादि धर्म जिसका सर्वमान्य ग्रंथ अपौरुषेय वेद है। हिंदू तो बौद्ध, जैन, सिख आदि भी हैं, पर सनातन हिंदू वह है जो वेदों को मानता है, वेदों को जानकर उसी तरह से आचरण करता है। सनातन धर्म व हिंदू धर्म में कोई अंतर नहीं है। सनातन कहने के पीछे उद्देश्य धर्म की प्रचीनता बताना है। 
 

भगवा का क्रेज बढ़ा हैं, धर्म का पालन सिर्फ भगवा पहन के ही किया जा सकता या कुछ और भी रास्ते हैं? 
भगवा वस्त्र त्याग व तितिक्षा का प्रतीक माना जाता है। त्यागी तितिक्षु संन्यासी ही भगवा वस्त्र धारण करने के योग्य हैं, क्योंकि उनका शास्त्रीय परिधान भगवा वस्त्र होता है। किसी भी वर्ण 'जाति' व आश्रम में रहकर या किसी भी प्रकार का वस्त्र पहनकर धर्म का पालन किया जा सकता है। 
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