स्वामी अभेदानंद बोले : बाहरी परिस्थितियां नहीं, हमारी सोच तय करती है दुख और सुख
क्या दुःख का कारण केवल बाहरी परिस्थितियाँ हैं, या हमारे मन की धारणाएँ? इन्हीं गूढ़ प्रश्नों का उत्तर देने और जीवन में आंतरिक शांति एवं संतुलन (balance) का मार्ग दिखाने के लिए चिन्मय मिशन प्रयागराज द्वारा 20 से 30 सितंबर 2026 तक 'गीता ज्ञान यज्ञ' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। चिन्मय मिशन के स्वामी अभेदानन्द सरस्वती जी श्रीमद्भगवद्गीता के नवम अध्याय पर आधारित अपने हृदयस्पर्शी प्रवचनों से साधकों का मार्गदर्शन करेंगे।
विस्तार
मनुष्य के जीवन की सबसे मुख्य आकांक्षाओं में से एक है, दुःख से पूर्ण मुक्ति। प्रायः हम अपने आसपास की परिस्थितियों और लोगों को बदलने का निरंतर प्रयास करते हैं, फिर भी दुःख और अशांति बनी रहती है। क्या हमारे दुःख का मुख्य कारण केवल बाहरी परिस्थितियां हैं, या उन परिस्थितियों के प्रति हमारी अपनी धारणाएं और व्याख्याएं भी इसके लिए उत्तरदायी हैं।
इन्हीं गहन प्रश्नों पर शास्त्रीय दृष्टि और आत्मचिंतन प्रदान करने के उद्देश्य से चिन्मय मिशन प्रयागराज द्वारा 20 से 30 सितंबर 2026 तक गीता ज्ञान यज्ञ आयोजित किया जा रहा है। इस पावन अवसर पर चिन्मय मिशन के आचार्य स्वामी अभेदानंद सरस्वती जी अपने विचारपूर्ण एवं जीवनोपयोगी प्रवचन प्रस्तुत करेंगे। प्रवचन प्रतिदिन सायं 6:30 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक चिन्मय मिशन आश्रम, प्रयागराज में आयोजित होंगे।
भगवद्गीता के नवम अध्याय की व्यावहारिक व्याख्या
इस ज्ञान यज्ञ में श्रीमद्भगवद्गीता के नवम अध्याय के गहन ज्ञान पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी। इसमें परमेश्वर के वास्तविक स्वरूप, स्वभाव और प्रभाव की विस्तृत व्याख्या करते हुए जीवन को समझने में उसकी प्रासंगिकता को अत्यंत सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
स्वामी अभेदानंद सरस्वती जी पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से वेदान्त, भक्ति और योग के ज्ञान को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। उन्होंने श्रीरामचरितमानस पर 600 दिनों की विस्तृत प्रवचन शृंखला सहित अनेक आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से साधकों का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है। उनका कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तृत रहा है, जिसमें दक्षिण अफ्रीका में छह आश्रमों और दो भव्य मंदिरों का निर्माण शामिल है।
मानवता की सेवा और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
अफ्रीका में स्वामी जी ने "नॉरिश टू फ्लरिश" (नामक जनकल्याणकारी पहल की संकल्पना की, जिसके माध्यम से प्रतिदिन 2,000 से अधिक वंचित लोगों को निःशुल्क पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है। इस सेवा अभियान से अब तक 3,00,000 से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। समाज और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए वर्ष 2024 में उन्हें "शिवानंद वर्ल्ड पीस अवॉर्ड" से अलंकृत किया गया।
दुःख से मुक्ति का आध्यात्मिक सूत्र
स्वामी जी के अनुसार, दुःख का मूल कारण बाहरी परिस्थितियों में नहीं, अपितु हमारी अपनी व्याख्याओं, धारणाओं और मान्यताओं में निहित होता है। उनका पावन संदेश है। "अपनी मानसिकता को बदलें, परिस्थितियां आपको व्यथित नहीं करेंगी। अपनी परेशानियों से युद्ध करने के स्थान पर, उस परेशान व्यक्तित्व को ही विलीन करने का प्रयास करें।" गीता का कालातीत ज्ञान हमें बाहरी परिस्थितियों को नियंत्रित करने की अपेक्षा अपने मन और दृष्टिकोण को समझने की दिशा प्रदान करता है। यह ज्ञान जीवन की चुनौतियों के मध्य विवेक, संतुलन और आंतरिक शक्ति विकसित करने का मार्ग दिखाता है।
प्रातःकालीन वेदांत कक्षाए: 'दशश्लोकी' पर गहन चर्चा
ज्ञान यज्ञ की इस पावन यात्रा को आगे बढ़ाते हुए 21 से 30 सितंबर तक प्रतिदिन प्रातः श्री आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित 'दशश्लोकी' पर वेदांत की विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। ये कक्षाएं प्रातः 8:00 बजे से 9:00 बजे तक होंगी, जिनमें प्रतिभागियों को वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझने और आत्मचिंतन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा।
यह आयोजन केवल प्रवचनों की शृंखला नहीं है, बल्कि स्वयं को जानने, जीवन को एक नई दिव्य दृष्टि से देखने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का एक दुर्लभ अवसर है। चिन्मय मिशन प्रयागराज सभी जिज्ञासु साधकों, परिवारों, युवाओं और जीवन के सत्य को खोजने वाले हर व्यक्ति को इस ज्ञान यज्ञ में सहभागिता करनी चाहिए।