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भ्रष्टाचार के आरोपी पुलिसकर्मियों के निलंबन पर रोक
Fri, 22 Jan 2021 07:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 22 Jan 2021 07:33 PM IST
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- फोटो : prayagraj
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गाजियाबाद में एटीएम लूटने के आरोपियों से बरामद रकम खुद हड़प जाने के आरोपी पुलिस कर्मियों के निलंबन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि निलंबन की कार्रवाई करते समय अधिकारियों के पास ऐसा करने का कोई आधार नहीं था। विभागीय जांच भी नहीं की गई थी। कोर्ट ने पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी रखने की छूट दी है।
निलंबित पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि इन्होंने एटीएम लूट कांड के अभियुक्त राजीव सचान व आमिर को गिरफ्तार कर उनसे लूट के 45 लाख 81 हजार 500 की बरामदगी दिखाई थी। जबकि अभियुक्तों ने कहा था कि उनसे एक करोड़ 20 लाख रूपए पुलिस ने बरामद किया था ।
अभियुक्तों के बयान के बाद एस एस पी गाजियाबाद ने इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान समेत छह अन्य पुलिस कर्मियों को 25 सितंबर 2019 को निलंबित करते गाजियाबाद पुलिस लाइंस में संबद्ध कर दिया गया था । याचीगण को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेज दिया गया जिनकी जमानत बाद में हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली थी।
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याचीगण के निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि निलंबन आदेश नियम व कानून के विरूद्ध है । अधिवक्ता का कहना था कि निलंबन आदेश पारित करते समय सक्षम अधिकारी के समक्ष कोई तथ्य नहीं था । कहा गया कि निलंबन आदेश सच्चिदानंद त्रिपाठी केस में हाईकोर्ट द्वारा दी गई विधि व्यवस्था के विरूद्ध है ।कांस्टेबल सौरभ शर्मा, सचिन कुमार, व धीरज भारद्वाज ने अलग अलग याचिकाएं दाखिल की थी। इन पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और न्यायमूर्ति अजय भनोट ने एकलपीठ में सुनवाई करते हुए निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है।
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निलंबित पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि इन्होंने एटीएम लूट कांड के अभियुक्त राजीव सचान व आमिर को गिरफ्तार कर उनसे लूट के 45 लाख 81 हजार 500 की बरामदगी दिखाई थी। जबकि अभियुक्तों ने कहा था कि उनसे एक करोड़ 20 लाख रूपए पुलिस ने बरामद किया था ।
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अभियुक्तों के बयान के बाद एस एस पी गाजियाबाद ने इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान समेत छह अन्य पुलिस कर्मियों को 25 सितंबर 2019 को निलंबित करते गाजियाबाद पुलिस लाइंस में संबद्ध कर दिया गया था । याचीगण को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेज दिया गया जिनकी जमानत बाद में हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली थी।
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याचीगण के निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि निलंबन आदेश नियम व कानून के विरूद्ध है । अधिवक्ता का कहना था कि निलंबन आदेश पारित करते समय सक्षम अधिकारी के समक्ष कोई तथ्य नहीं था । कहा गया कि निलंबन आदेश सच्चिदानंद त्रिपाठी केस में हाईकोर्ट द्वारा दी गई विधि व्यवस्था के विरूद्ध है ।कांस्टेबल सौरभ शर्मा, सचिन कुमार, व धीरज भारद्वाज ने अलग अलग याचिकाएं दाखिल की थी। इन पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और न्यायमूर्ति अजय भनोट ने एकलपीठ में सुनवाई करते हुए निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है।