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एसआरएन में नर्स से छेड़खानी का आरोपी डॉक्टर निलंबित
Sun, 02 Jun 2019 01:15 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 02 Jun 2019 01:15 AM IST
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हस्तरेखा चिकित्सक
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एसआरएन अस्पताल में स्टाफ नर्स संग छेड़खानी के आरोपी डॉ.राघवेंद्र को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने निलंबित कर दिया है। उसे प्रधानाचार्य कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही उसके कामकाज पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी है। उधर, निलंबन के बावजूद नर्सों का गुस्सा थमा नहीं। वे आरोपी डॉक्टर के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
एसआरएन की इमरजेंसी ओटी (ट्रामा) के ड्यूटी रूम के बाहर बीते बुधवार की देर रात स्टाफ नर्स के साथ छेड़छाड़ की गई थी। आरोप एनेस्थिसिया विभाग के जेआर-तीन में तैनात डॉ.राघवेंद्र पर लगा था। मामला सामने आने पर अन्य नर्सों ने भी मोर्चा खोल दिया और बृहस्पतिवार से हड़ताल कर दी। प्रधानाचार्य डॉ.एसपी सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी थी।
सूत्रों की मानें तो मामले में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ.रजनीश दुबे की पूछताछ के बाद कॉलेज प्रशासन ने आननफानन में यह कार्रवाई की। प्रमुख सचिव को शनिवार को एसआरएन अस्पताल भी आना था। उनके दौरे को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने अपनी तैयारियां भी की थी, लेकिन अंतिम समय में उनका कार्यक्रम टल गया।
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आक्रोशित नर्सों ने शनिवार को अस्पताल एसआईसी का करीब पांच घंटे तक घेराव किया। इस दौरान इमरजेंसी को छोड़कर नर्सें कहीं ड्यूटी पर नहीं थीं। ऐसे में दवाई, इंजेक्शन से लेकर मरीजों को ड्रिप देने तक का काम रुक गया। इसी क्रम में एनेथिसिया एवं सर्जरी विभाग के आईसीयू में भर्ती पांच मरीजों की सांस ड्रिप से दवाई न मिलने से दोपहर के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। जूनियर डॉक्टरों ने पहुंचकर मरीजों को खुद ड्रिप लगाई, जिससे कुछ देर बाद उनकी हालत में सुधार आया। शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद नर्सों का गुस्सा थमा तो काम पर लौटीं।
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एसआरएन की इमरजेंसी ओटी (ट्रामा) के ड्यूटी रूम के बाहर बीते बुधवार की देर रात स्टाफ नर्स के साथ छेड़छाड़ की गई थी। आरोप एनेस्थिसिया विभाग के जेआर-तीन में तैनात डॉ.राघवेंद्र पर लगा था। मामला सामने आने पर अन्य नर्सों ने भी मोर्चा खोल दिया और बृहस्पतिवार से हड़ताल कर दी। प्रधानाचार्य डॉ.एसपी सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी थी।
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सूत्रों की मानें तो मामले में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ.रजनीश दुबे की पूछताछ के बाद कॉलेज प्रशासन ने आननफानन में यह कार्रवाई की। प्रमुख सचिव को शनिवार को एसआरएन अस्पताल भी आना था। उनके दौरे को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने अपनी तैयारियां भी की थी, लेकिन अंतिम समय में उनका कार्यक्रम टल गया।
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आक्रोशित नर्सों ने शनिवार को अस्पताल एसआईसी का करीब पांच घंटे तक घेराव किया। इस दौरान इमरजेंसी को छोड़कर नर्सें कहीं ड्यूटी पर नहीं थीं। ऐसे में दवाई, इंजेक्शन से लेकर मरीजों को ड्रिप देने तक का काम रुक गया। इसी क्रम में एनेथिसिया एवं सर्जरी विभाग के आईसीयू में भर्ती पांच मरीजों की सांस ड्रिप से दवाई न मिलने से दोपहर के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। जूनियर डॉक्टरों ने पहुंचकर मरीजों को खुद ड्रिप लगाई, जिससे कुछ देर बाद उनकी हालत में सुधार आया। शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद नर्सों का गुस्सा थमा तो काम पर लौटीं।