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दवा बाजार से सर्जिकल टोपी गुम
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लॉक डाउन में थोक दवा बाजार लीडर रोड की दुकानों से सर्जिकल टोपी गुम है। आर्डर के मुताबिक माल न आने के कारण टोपियों की किल्लत बनी है। तीन रुपये में बिकने वाली सर्जिकल टोपी आठ रुपये देेने पर भी नहीं मिल रही है। इस टोपी की इन दिनों निजी अस्पतालों में भारी मांग है।
नर्सिंग होम संचालक इन दिनों डॉक्टरों और नर्सिंग, पैरामेडिकल स्टाफ के लिए मास्क, सर्जिकल टोपी, दस्ताने और पीपीई किट की खरीद कर रहे हैं। भारी मांग के कारण आर्डर के 15 दिन बाद पीपीई किट और मास्क का स्टाक तो बाजार में आ गया है, लेकिन सर्जिकल टोपी की किल्लत बनी है। जरूरतमंदों ने दस रुपये पीस के भाव से भी सर्जिकल टोपियां खरीदी हैं। वहीं कई संस्थाएं नि:शुल्क वितरण के लिए भी सर्जिकल उत्पाद खरीद रही हैं। इससे मांग और आपूर्ति में अंतर बना हुआ है।
दवा और सर्जिकल गुड्स विक्रेता नीरज पुरवार के मुताबिक पीपीई किट की कई वेराइटी बाजार में उपलब्ध हैं। 700 से 1800 (जीएसटी समेत) पीपीई किट की उपलब्धता है। क्वालिटी के हिसाब से पीपीई किट के दाम हैं। उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम संचालकों के साथ कई संस्थाओं के प्रतिनिधि भी पीपीई किट खरीदने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं।
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लॉक डाउन में सर्जिकल उत्पाद लागत मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दुकानदारों की मांग मास्क और सैनिटाइजर तक सीमित हैं। ट्रांसपोर्ट की दिक्कतों की वजह से संस्थाओं को सर्जिकल टोपी नहीं मिल पा रही है। उम्मीद है कि सोमवार तक इसका स्टाक भी बाजार में आ जाएगा। टोपी के दाम भी पांच से छह रुपये तक हो सकते हैं।
अनिल दुबे, अध्यक्ष इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
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नर्सिंग होम संचालक इन दिनों डॉक्टरों और नर्सिंग, पैरामेडिकल स्टाफ के लिए मास्क, सर्जिकल टोपी, दस्ताने और पीपीई किट की खरीद कर रहे हैं। भारी मांग के कारण आर्डर के 15 दिन बाद पीपीई किट और मास्क का स्टाक तो बाजार में आ गया है, लेकिन सर्जिकल टोपी की किल्लत बनी है। जरूरतमंदों ने दस रुपये पीस के भाव से भी सर्जिकल टोपियां खरीदी हैं। वहीं कई संस्थाएं नि:शुल्क वितरण के लिए भी सर्जिकल उत्पाद खरीद रही हैं। इससे मांग और आपूर्ति में अंतर बना हुआ है।
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दवा और सर्जिकल गुड्स विक्रेता नीरज पुरवार के मुताबिक पीपीई किट की कई वेराइटी बाजार में उपलब्ध हैं। 700 से 1800 (जीएसटी समेत) पीपीई किट की उपलब्धता है। क्वालिटी के हिसाब से पीपीई किट के दाम हैं। उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम संचालकों के साथ कई संस्थाओं के प्रतिनिधि भी पीपीई किट खरीदने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं।
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लॉक डाउन में सर्जिकल उत्पाद लागत मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दुकानदारों की मांग मास्क और सैनिटाइजर तक सीमित हैं। ट्रांसपोर्ट की दिक्कतों की वजह से संस्थाओं को सर्जिकल टोपी नहीं मिल पा रही है। उम्मीद है कि सोमवार तक इसका स्टाक भी बाजार में आ जाएगा। टोपी के दाम भी पांच से छह रुपये तक हो सकते हैं।
अनिल दुबे, अध्यक्ष इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन