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सुप्रीम कोर्ट की टीम को नहीं दिखी स्कूलों की बदहाली

Sat, 26 Nov 2016 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 26 Nov 2016 02:10 AM IST
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Supreme Court team showed the collapse of schools
अंबेडकरनगर के ऐसे बदहाल परिषदीय विद्यालयों की तरफ नहीं बढ़ पा रहा अभिभावकों का झुकाव। - फोटो : अमर उजाला
बदहाल स्कूल अपने हाल पर आंसू बहाते रहे और जांच टीम खानापूर्ति कर शुक्रवार को लौट गई। शिक्षा विभाग के अधिकारी टीम को वहीं ले गए जहां सजा-सजाया था। ऐसे में अब प्राथमिक स्कूलों में सुधार रामभरोसे ही है। विभाग के अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेेने आई टीम को गुमराह करने में सफल रहे। 
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अफसर जांच टीम को गांव के दूर-दराज स्कूलों से तो दूर रखने में कामयाब रहे ही साथ में शहर के बदहाल स्कूलों प्राथमिक विद्यालय नेवादा राजापुर, सोहबतिया बाग, दारागंज, हीवेट रोड को भी दिखाने नहीं ले गए। अमर उजाला की ओर से 24 नवंबर को अपने अंक में जिले के प्राथमिक विद्यालयों की बदहाली की जो रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जांच टीम उन स्कूलों में से किसी की ओर झांकने नहीं गई। जिले के बेसिक शिक्षा से जुड़े अधिकारियों ने जांच टीम को सबसे अच्छे प्राथमिक विद्यालय के रूप में पहचाने जाने वाले सोरांव ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बिशुनदास का पूरा, प्राथमिक एवं पूर्व विद्यालय थरवई, प्राथमिक विद्यालय मटियारा, मऊआइमा के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय बड़गांव, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय जमुई, प्राथमिक विद्यालय बड़गांव द्वितीय का निरीक्षण किया।
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ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के निरीक्षण के बाद जांच टीम प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक फाफामऊ, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक नया कटरा, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय हरवारा का निरीक्षण किया। जांच टीम के सदस्यों गौरव अग्रवाल एवं अशोक गुप्ता के साथ एडी बेसिक रमेश तिवारी, बीएसए हरिकेश यादव, मिड-डे मील कोआर्डिनेटर राजीव त्रिपाठी सहित संबंधित खंड शिक्षाधिकारी मौजूद रहे। जांच टीम ने प्राथमिक विद्यालय बिशुनदास का पूरा के निरीक्षण में चाक-चौबंद व्यवस्था के लिए अधिकारियों के साथ प्रधानाध्यापिका सरिता दुबे के प्रयास की सराहना की।
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विद्यालयों की जांच के दौरान पीने के पानी के लिए नल (रनिंग वाटर) की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। इसके साथ विद्यालयों में शौचालय के ऊपर पानी की टंकी रखने का सुझाव दिया। इससे बच्चों को नल से पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। विद्यालयों के शौचालय में सफाई बनाए रखने केलिए सफाईकर्मी रखने का सुझाव दिया गया।
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